हाईवे पर सफर करने वाले लोगों के लिए FASTag ने यात्रा को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। सरकार के मुताबिक, पहले किसी वाहन को टोल प्लाजा पार करने में औसतन 12.23 मिनट लगते थे, लेकिन डिजिटल टोलिंग व्यवस्था लागू होने के बाद अब यही समय घटकर करीब 40 सेकेंड रह गया है। इससे यात्रियों का समय बचने के साथ टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों में भी कमी आई है।
कैसे कम हुआ टोल पार करने का समय?
सरकार के अनुसार, देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर अब 98 प्रतिशत से अधिक टोल वसूली FASTag के जरिए की जा रही है। इसके अलावा पांच टोल प्लाजा पर बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम भी शुरू किया गया है, जहां ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) और RFID तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस व्यवस्था से वाहनों को बिना अधिक रुके टोल पार करने में मदद मिल रही है।
पांच साल में दोगुना हुआ टोल कलेक्शन
संसद में सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल कलेक्शन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2021-22 में जहां कुल टोल कलेक्शन ₹33,928.66 करोड़ था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर ₹70,278.18 करोड़ हो गया। यानी पांच वर्षों में टोल संग्रह दोगुने से भी अधिक हो गया है।
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हर साल बढ़ता गया राजस्व
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में टोल कलेक्शन ₹48,032.40 करोड़, 2023-24 में ₹55,884.12 करोड़, 2024-25 में ₹61,408.15 करोड़ और 2025-26 में ₹70,278.18 करोड़ दर्ज किया गया। इससे स्पष्ट है कि FASTag और डिजिटल टोलिंग व्यवस्था लागू होने के बाद टोल संग्रह में लगातार वृद्धि हुई है।
डिजिटल टोलिंग से यात्रियों को फायदा
सरकार का कहना है कि FASTag और नई डिजिटल टोलिंग तकनीक से न केवल टोल वसूली की प्रक्रिया तेज हुई है, बल्कि ईंधन की बचत, ट्रैफिक जाम में कमी और यात्रियों के समय की भी बचत हो रही है। आने वाले समय में बैरियर-फ्री टोलिंग व्यवस्था का दायरा और बढ़ाए जाने की संभावना है।