उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में स्थित कृपालपुर गांव की दो जुझारू महिलाओं कलावती और सीमा देवी ने प्रशासन की अनदेखी से परेशान होकर एक बेहद प्रेरणादायक कदम उठाया है.बता दें कि गांव में रिंद नदी पर सालों से पुल की मांग करते रहे स्थानीय लोग, लेकिन सांसद और विधायकों के आश्वासनों पर सिर्फ भरोसा ही बना रहा. बच्चों की पढ़ाई समेत हाट‑बाजार, अस्पताल और चारे के लिए नदी पार करना एक दैनिक जोखिम बन गया. इस स्थिति को देखते हुए कलावती और सीमा ने गांव की महिलाओं को एकत्रित किया और लगभग ₹70–80 हज़ार खर्च कर लकड़ी और बांस से अस्थाई पुल का निर्माण शुरू कर दिया, जो अब ग्रामीणों की मदद से तेजी से बनकर तैयार हो रहा है. यह कदम सिर्फ बच्चों के भविष्य की रक्षा नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुका है.
आत्मविश्वास की मजबूत डो
कृपालपुर गांव की दो महिलाओ कलावती और सीमा देवी ने सरकारी उदासीनता के बीच रिंद नदी पर अस्थाई पुल बनाकर जो मिसाल कायम की है, वह सिर्फ स्थानीय समस्या का समाधान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सामुदायिक एकता की प्रेरणा भी है. पिछले 30 साल से स्थानीयों और जनप्रतिनिधियों (सांसद और विधायक) से रिंद नदी पर स्थायी पुल की मांग की जा रही थी, लेकिन अब तक सिर्फ वादे ही वादे सुनने को मिले. बरसात के दिनों में नदी उफान पर आ जाती है और रोज़ाना लगभग 250–300 स्कूली बच्चे नाव पर स्कूल जाते समय जीवन को जोखिम में डालते हैं.
महिलाओं का बुलंद जज़्बा
कलावती और सीमा देवी ने अकेले इस मिशन की शुरुआत की. वो खुद बांस, लकड़ी और पोल इकट्ठा कर इस अस्थाई पुल का निर्माण कर रही हैं. उन्होंने खुद से लगभग ₹70–80 हज़ार खर्च किए. बाद में गांव की बाकी महिलाएँ और अन्य लोग इस मुहिम से जुड़ गए. गांव में बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से तय हुआ कि अब हर कोई अपनी क्षमता अनुसार सहयोग करेगा — तन, मन और धन से.
यह अस्थाई पुल रिंद नदी को पार करने के लिए लकड़ी और पोल से तैयार किया जा रहा है, जिससे पैदल और मोटर साइकिल से आवागमन सुरक्षित हो सके. पुल की सहायता से जरूरतमंद बच्चे स्कूल, मरीज अस्पताल जा सकेंगे और किसानों को चारा और बाज़ार आसानी से मिल सकेगा.
प्रशासन की प्रतिक्रिया
SDM बिंदकी दुर्गेश कुमार यादव ने ग्रामीणों की पहल की सराहना की, लेकिन चेतावनी दी कि यह निर्माण तकनीकी रूप से अवैध और ख़तरे से भरा हो सकता है. उन्होंने स्थायी समाधान के लिए राज्य सेतु निगम को प्रस्ताव भेजा और अगले वित्तीय वर्ष में एक 90 मीटर लंबा पक्का पुल बनाने की बात कही. वहीं विधायक राजेन्द्र सिंह पटेल और सांसद नरेश सिंह उत्तम ने भी मामले के संज्ञान में लेने और मदद का आश्वासन दिया.
कितना होगा असर?
इस अस्थाई पुल से 20 से ज़्यादा आस-पास के गांव के लोग (जैसे कि भैरमपुर, नरैनी, पनेरूआ ) रोजाना का आवागमन सुरक्षित तरीके से कर पाएंगे. यहां की छात्रा ज्योति कहती हैं, “बरसात में नाव डूबने का डर आम था. अब फैसला लेकर जीवन रक्षा और पढ़ाई दोनों सुरक्षित रहेगी”. स्थानीय ग्रामीण महेंद्र निषाद ने कहा, “यह सिर्फ पुल नहीं, हमारी चेतना की शुरुआत है”.