मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सिरप से हुई बच्चों की मौतों के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। FDA ने प्रदेश में ओवर-द-काउंटर कफ सिरप बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अब बिना प्रिस्क्रिप्शन कोई भी सिरप नहीं बिकेगा। सभी फार्मा कंपनियों को DEG-PEG टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है और हर सिरप बैच की क्वालिटी रिपोर्ट जांची जाएगी। एमपी में अब तक 1086 बोतलें जब्त हो चुकी हैं, जिससे फार्मा इंडस्ट्री में हड़कंप मचा है।
जहरीले सिरप कांड के बाद सख्त हुआ FDA
कोल्ड्रिफ और रेस्पिफ्रेश टीआर जैसे जहरीले कफ सिरप में पाए गए घातक रसायनों के बाद राज्य सरकार ने “नो टॉलरेंस पॉलिसी” अपना ली है। अब एफडीए की टीमें लगातार बाजार और गोदामों पर छापेमारी कर रही हैं।
अब तक राज्यभर से 243 सैंपल लैब जांच के लिए भेजे गए, जिनमें तीन सिरप ब्रांड फेल पाए गए हैं। जांच में डायएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लायकॉल (PEG) की मात्रा तय सीमा से कहीं अधिक मिली — जो किडनी, लीवर और ब्रेन के लिए अत्यंत घातक मानी जाती है।
हर बोतल पर होगी ‘स्कैनिंग’, कंपनियों को नए नियम
FDA ने आदेश जारी कर दिया है कि अब कोई भी कंपनी बिना लैब सर्टिफिकेशन के सिरप का बैच बाजार में नहीं उतार सकेगी। राज्य औषधि प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि हर रॉ मटेरियल की क्वालिटी रिपोर्ट लैब से प्रमाणित होनी चाहिए। साथ ही, अब हर बोतल की बारकोड स्कैनिंग अनिवार्य की जाएगी ताकि उसकी सप्लाई चेन को ट्रैक किया जा सके।
ओवर-द-काउंटर बिक्री पर रोक
सभी मेडिकल स्टोर्स को चेतावनी दी गई है कि वे बिना डॉक्टर के पर्चे के कफ सिरप नहीं बेच सकते।
थोक विक्रेताओं के लिए प्रति माह 1000 बोतलों की लिमिट और खुदरा विक्रेताओं के लिए 50 बोतलों की सीमा तय की गई है। साथ ही, सभी को बिक्री का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में बनाए रखना होगा।
कोडीन सिरप पर भी नजर
एफडीए ने खासतौर पर उन सिरप्स पर फोकस बढ़ाया है जिनका नशे के तौर पर इस्तेमाल बढ़ रहा है। कोडीन युक्त सिरप को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। सभी जिलों में औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।
एफडीए की जॉइंट कंट्रोलर टीना यादव ने बताया कि आने वाले महीनों में ओरल लिक्विड दवाओं की लगातार सैंपलिंग होगी ताकि किसी भी मिलावट या विषाक्त तत्व की पहचान समय रहते की जा सके।
जनता से अपील — बिना डॉक्टर सलाह दवा न लें
स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से अपील की है कि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी कफ सिरप या दवा न लें। जहरीले सिरप से 24 बच्चों की मौत ने एक बड़ा सबक दिया है — अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं बची।