फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाने वाली फुलेरा दूज का विशेष धार्मिक महत्व है। 19 फरवरी 2026, गुरुवार के दिन यह पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को फूलों से सजाकर विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विवाह जैसे मांगलिक कार्य बिना अधिक विचार के भी किए जा सकते हैं। आइए जानते हैं इस दिन का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और विस्तृत पंचांग।
तिथि और नक्षत्र
पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल द्वितीया तिथि का आरंभ 18 फरवरी की रात से होकर 19 फरवरी को प्रमुख रूप से रहेगी। इस दिन चंद्रमा का गोचर शुभ नक्षत्र में होने से पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों के लिए दिन अनुकूल माना जा रहा है। द्वितीया तिथि सौम्यता और प्रेम का प्रतीक है, इसलिए राधा-कृष्ण की उपासना का विशेष फल मिलता है।
फुलेरा दूज का धार्मिक महत्व
फुलेरा दूज विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र में धूमधाम से मनाई जाती है। वृंदावन और मथुरा में मंदिरों को फूलों से सजाया जाता है और ठाकुर जी के साथ फूलों की होली खेली जाती है। यह पर्व प्रेम, आनंद और सौहार्द का संदेश देता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों में बाधाएं कम आती हैं और वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है।
शुभ मुहूर्त
19 फरवरी को अभिजीत मुहूर्त दोपहर के समय रहेगा, जो अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त प्रातःकालीन समय पूजा-अर्चना के लिए उत्तम रहेगा। जिन लोग विवाह या सगाई जैसे कार्य करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह दिन अनुकूल है। हालांकि किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित से परामर्श लेना बेहतर रहेगा।
राहुकाल का समय
गुरुवार को राहुकाल प्रायः दोपहर बाद पड़ता है। इस अवधि में नए कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए। राहुकाल के दौरान पूजा तो की जा सकती है, लेकिन मांगलिक या आर्थिक लेन-देन जैसे कार्य टालना शुभ माना जाता है। राहुकाल समाप्त होने के बाद कार्य प्रारंभ करना लाभकारी रहता है।
ब्रज में विशेष आयोजन
फुलेरा दूज के अवसर पर बांके बिहारी मंदिर में विशेष श्रृंगार और फूलों की वर्षा की जाती है। भक्त बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिरों में भजन-कीर्तन और रासलीला का आयोजन भी होता है, जिससे वातावरण भक्तिमय बन जाता है। यह पर्व होली के आगमन का संकेत भी देता है और ब्रज में उत्सवों की शुरुआत मानी जाती है। इस प्रकार 19 फरवरी 2026 का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ और मंगलकारी रहेगा। श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।