
भारत में दिवाली और छठ ऐसे त्योहार हैं, जिनका पूरे साल लोगों को इंतजार रहता है क्योंकि ये सिर्फ पूजा और परंपराओं के पर्व नहीं हैं, बल्कि परिवार और अपनों से मिलने का एक सुनहरा मौका भी होते हैं। यही कारण है कि इन त्योहारों पर देशभर से लाखों लोग अपने-अपने घरों को लौटते हैं लेकिन इस दौरान सफर करना जितना जरूरी होता है, उतना ही मुश्किल भी है।
ट्रेनों में टिकट की मारामारी
त्योहारों का सीजन आते ही सबसे पहले रेलवे की टिकटों पर दबाव बढ़ जाता है। पटना, वाराणसी, रांची और लखनऊ जैसे शहरों के लिए चलने वाली ट्रेनों में हफ्तों पहले ही सभी सीटें फुल हो चुकी होती हैं। हालात यह है कि अब केवल लंबी वेटिंग लिस्ट नजर आती है, जिसमें कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बेहद कम होती है।
रेलवे का सहारा- स्पेशल ट्रेनें और तत्काल
वहीं भारतीय रेलवे हर साल त्योहारों के दौरान यात्रियों की भीड़ को देखते हुए स्पेशल ट्रेनें चलाता है। इस बार भी हजारों स्पेशल ट्रेनों का ऐलान किया गया है। जिन यात्रियों को सामान्य बुकिंग में टिकट नहीं मिल रहा, वे इन स्पेशल ट्रेनों का विकल्प चुन सकते हैं। इसके अलावा तत्काल टिकट की सुविधा भी रेलवे की तरफ से मुहैया कराई जा रही है। ये टिकटें लोग यात्रा से एक दिन पहले बुक कर सकते हैं। हालांकि इसमें 100% कंफर्म सीट की गारंटी नहीं होती लेकिन रेलवे के नए नियम के तहत आम यात्रियों को एजेंट्स पर प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में थोड़ी उम्मीद यहां से भी बनी रहती है।
आसमान छू रहा फ्लाइट का किराया
इसके बाद जब ट्रेन में जगह नहीं मिलती तो लोग मजबूरी में हवाई सफर की ओर रुख कर लेते हैं लेकिन यहां यात्रियों की जेब पर सबसे बड़ा बोझ पड़ता है। जो कि है हवाई सफर का किराया। बात करें दिल्ली से पटना की फ्लाइट की तो सामान्य दिनों में इसकी टिकट 4–5 हजार रुपये में मिल जाती है। वहीं त्योहारों के दौरान इसी फ्लाइट की टिकटों की कीमत 12 से 15 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। वाराणसी, लखनऊ और रांची जैसे रूट्स पर भी टिकटों की कीमत दोगुनी-तिगुनी हो चुकी है।
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डायनेमिक प्राइसिंग से यात्रियों की परेशानी
एयरलाइंस त्योहारों के समय मांग बढ़ने पर डायनेमिक प्राइसिंग लागू कर देती हैं। जिसका मतलब है कि जैसे-जैसे सीटें कम होती जाती हैं, टिकट की कीमत बढ़ती जाती है। जो यात्री आखिरी समय पर टिकट बुक कर पाते हैं, उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ता है। यही वजह है कि त्योहार के दिनों में फ्लाइट टिकट आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाते हैं।
लोगों के लिए घर पहुंचने का आखिरी विकल्प- बसें
अगर ट्रेन और फ्लाइट दोनों ही रास्ते बंद हो जाएं, तो बस से सफर करना एकमात्र विकल्प बचता है। त्योहारों के दिनों में बसों का किराया भी सामान्य से ज्यादा हो जाता है लेकिन फ्लाइट के मुकाबले यह अब भी सस्ता है। हां, सफर लंबा और थकाऊ जरूर होता है, मगर जेब पर भारी नहीं पड़ता।
पहले से करें तैयारी, तभी बनेगी बात
त्योहारों में घर लौटना आसान नहीं है लेकिन नामुमकिन भी नहीं। जरुरत है तो बस पहले से योजना बनाने की। जैसे ही रेलवे की स्पेशल ट्रेनों की घोषणा हो, तुरंत टिकट बुक कर लेना बेहतर रहता है। वहीं अगर फ्लाइट का विकल्प चुनना हो तो आखिरी समय तक इंतजार न करें, वरना किराया जेब ढीली कर देगा।