Final voter list released: पश्चिम बंगाल में निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी है। जारी सूची के अनुसार कुल 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि लगभग 60 लाख नाम अभी भी जांच के अधीन हैं। इस निर्णय से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आगामी विधानसभा चुनावों पर इसके प्रभाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
पहले भी हटे थे नाम
निर्वाचन आयोग ने पिछले वर्ष अक्तूबर के अंत में विशेष पुनरीक्षण अभियान प्रारंभ किया था। नवंबर से प्रपत्र वितरण शुरू हुआ और दिसंबर में प्रारूप सूची जारी की गई। उस समय भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए थे, जिनमें मृतक, स्थानांतरित तथा एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत मतदाता शामिल थे। अंतिम सूची में अतिरिक्त नाम हटने के बाद कुल संख्या 65 लाख हो गई है।
हजारों नाम सूची से बाहर
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में भी उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किए गए हैं। यहां 47 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि 14 हजार से ज्यादा नाम लंबित सूची में रखे गए हैं। अभिलेख सत्यापन के बाद यह संख्या बढ़ सकती है।
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आरोप और प्रत्यारोप
भारतीय जनता पार्टी और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के बीच इस विषय पर तीखी बयानबाजी देखी जा रही है। एक पक्ष ने इसे निष्पक्ष प्रक्रिया बताया है, तो दूसरे ने वैध मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया है। कुछ नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पात्र नागरिकों के नाम हटाए गए तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
चुनावी असर
विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर नाम हटने से चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिनका नाम सूची से हटाया गया है, वे नियमानुसार पुनः आवेदन कर सकते हैं। अब सबकी निगाहें लंबित नामों के अंतिम निर्णय और उसके राजनीतिक प्रभाव पर टिकी हैं।