त्योहारों के मौसम में जहां बाजार में रौनक और उपहारों की खरीदारी का सिलसिला तेज हो जाता है, वहीं केंद्र सरकार ने इस बार बड़ा फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे दिवाली सहित किसी भी त्योहार पर गिफ्ट्स खरीदने या बांटने से बचें। सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक संसाधनों का सही इस्तेमाल करते हुए गैर-जरूरी खर्च को रोकना और अर्थव्यवस्था को मजबूत दिशा देना अब समय की जरूरत है।
वित्त मंत्रालय का नया आदेश
19 सितंबर 2025 को वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर ने एक ऑफिस मेमोरेंडम जारी किया है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि दिवाली या अन्य त्योहारों पर गिफ्ट्स पर खर्च पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। मंत्रालय का कहना है कि इस कदम से गैर-आवश्यक खर्चों को रोका जा सकेगा और राजकोषीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
सार्वजनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग
सरकार का मानना है कि त्योहारों पर होने वाले भव्य खर्च को सीमित कर इन पैसों को जनहित और विकास कार्यों में लगाया जा सकता है। सार्वजनिक संसाधनों का सही दिशा में उपयोग न केवल आर्थिक अनुशासन को मजबूत करेगा बल्कि देश की प्राथमिक परियोजनाओं को भी गति देगा।
अर्थव्यवस्था को मजबूती की तैयारी
हाल ही में 22 सितंबर से जीएसटी 2.0 रिफॉर्म लागू किए गए हैं, जिनसे कई वस्तुओं की कीमतों में कमी आई है। इससे बाजार में मांग बढ़ने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य दोहरा है—एक तरफ उपभोग को प्रोत्साहन देना और दूसरी ओर गैर-जरूरी खर्चों में कटौती कर वित्तीय संतुलन बनाए रखना।
जनता पर असर और आगे की उम्मीद
त्योहारी सीजन में सरकारी गिफ्ट्स पर रोक का सीधा असर आम कर्मचारियों और कॉर्पोरेट उपक्रमों पर भी पड़ेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला लंबे समय में देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है।