गोरखपुर। आज यानी 28 फरवरी की शाम आप सभी अपनी नजरें आसमान की ओर टिका लीजिए। इस दिन हमारे सौर मंडल के 6 ग्रह, बुध, शुक्र, शनि, अरुण, वरुण और बृहस्पति, लगभग एक ही कतार में दिखाई देंगे। यह वह खगोलीय स्थिति है, जब सौर मंडल के कई ग्रह एक ही समय में आकाश के लगभग एक ही हिस्से में, एक काल्पनिक रेखा के आसपास दिखाई देते हैं।
खगोल वैज्ञानिक रूप से इसका अर्थ है कि सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा लगभग एक ही समतल में करते हैं, जो पृथ्वी से देखने पर यह सभी उसी मार्ग पर एक कतार या चाप में दिखाई देते हैं। वहीं खगोलविद की मानें तो 3 या अधिक ग्रह एक साथ दिखाई दें तो सामान्यत: इसे “प्लैनेटरी परेड” कहा जाता है। 6 या उससे अधिक ग्रहों का एक साथ दृश्य होना और भी कम बार होता है।
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह अद्भुत खगोलीय नजारा सूर्यास्त के लगभग 30 मिनट बाद शुरू होगा। आपको बस एक ऐसी जगह ढूंढ़नी है, जहां से पश्चिमी क्षितिज साफ दिखाई दे। बिना टेलिस्कोप के (नग्न आंखों से): शुक्र, बृहस्पति, बुध और शनि को आप बिना किसी उपकरण के देख पाएंगे। उस दौरान शुक्र ग्रह और वृहस्पति ग्रह की चमक अन्य साथी ग्रहों के मुक़ाबले सबसे ज्यादा दिखाई देगी। यह भी है कि अरुण ग्रह को देखने के लिए किसी अच्छी टेलिस्कोप / दूरबीन या किसी विशेष बाइनाकुलर की जरूरत होगी, जबकि नेपच्यून को केवल किसी शक्तिशाली टेलिस्कोप से ही देखा जा सकेगा। इस दौरान आकाश में चांद का भी साथ होगा और इस शाम चांद भी 92 प्रतिशत चमक के साथ बृहस्पति के बेहद करीब (लगभग 4°) पर नजर आएगा, जो इस दृश्य को और भी खूबसूरत बना देगा। इस प्रकार की खगोलीय घटना को खगोल विज्ञान की भाषा में 'प्लैनेटरी अलाइनमेंट' या ग्रहीय संरेखण भी कहा जाता है।"
क्या यह सभी ग्रह, हक़ीकत में एक साथ होंगे ?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दूरी से ये ग्रह केवल पृथ्वी से देखने पर एक लाइन में दिखते हैं, अंतरिक्ष में ये एक-दूसरे से करोड़ों किलोमीटर दूर अपनी कक्षाओं में होते हैं। यदि सामने ऊंची इमारतें या पेड़ हैं, तो आप नीचे स्थित ग्रहों (बुध और शनि) को नहीं देख पाएंगे। साथ ही मौसम का हाल ख़्याल रखना ही होता है कि इसके लिए आसमान का साफ और बादल रहित होना अनिवार्य है। कई प्रमुख समस्याओं में से एक जो कि है प्रकाश प्रदूषण इसीलिए इस लाइट पोल्यूशन से भी बचें, शहर की तेज लाइटों से दूर अंधेरी जगह पर यह नजारा और भी साफ एवं स्पष्ट दिखेगा।
खगोलविद के अनुसार, जो लोग इन ग्रहों को एक कतार में देखना चाहते हैं, उन्हें 28 फरवरी को सूर्यास्त के लगभग 25 से 30 मिनट बाद पश्चिम दिशा के आकाश की तरफ देखना चाहिए, लेकिन अगर आपको और भी अधिक स्पष्ट एवं सार्थक नजारा देखना है, तब एक शर्त है कि, इसके लिए साफ आसमान, पश्चिमी क्षितिज का स्पष्ट दृश्य और बेहतर अवलोकन के लिए किसी अच्छी दूरबीन/टेलीस्कोप या विशेष बिनाकुलर का होना जरूरी है।