मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर किन्नर समाज का ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। लालघाटी क्षेत्र में आयोजित पट्टाभिषेक समारोह में काजल ठाकुर को देश का पहला किन्नर शंकराचार्य घोषित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान 200 से अधिक किन्नरों की सनातन धर्म में वापसी का भी दावा किया गया है, जिससे यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है।
लालघाटी में ऐतिहासिक पट्टाभिषेक समारोह
लालघाटी स्थित एक मैरिज गार्डन में सुबह 10 बजे से विशेष धार्मिक अनुष्ठान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पट्टाभिषेक की रस्में शुरू होंगी। आयोजकों के अनुसार, काजल ठाकुर को औपचारिक रूप से शंकराचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया जाएगा। इस मौके पर देशभर से किन्नर समाज के प्रतिनिधि, संत और महामंडलेश्वर शामिल होंगे। कार्यक्रम को किन्नर समाज की धार्मिक पहचान के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
200 किन्नरों की ‘घर वापसी’ का दावा
आयोजकों का कहना है कि समारोह के दौरान करीब 200 किन्नर सनातन धर्म में वापसी करेंगे। इसे सामाजिक और धार्मिक समावेशन की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। किन्नर अखाड़े के पदाधिकारियों का मानना है कि इससे ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा की धार्मिक संरचना में सम्मानजनक स्थान मिलेगा और उन्हें आध्यात्मिक नेतृत्व की भूमिका भी प्राप्त होगी।
समुदाय के भीतर मतभेद और विरोध की आशंका
हालांकि इस आयोजन को लेकर ट्रांसजेंडर समुदाय के भीतर मतभेद भी सामने आए हैं। एक अन्य गुट ने कार्यक्रम पर आपत्ति जताई है और विरोध की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि भोपाल में पिछले कुछ समय से वर्चस्व को लेकर किन्नर समाज के अलग-अलग गुटों के बीच तनाव बना हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर शांति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं।
संतों और महामंडलेश्वरों की मौजूदगी
समारोह में विभिन्न राज्यों से आए किन्नर संतों को भी ‘महामंडलेश्वर’ की उपाधि दिए जाने की तैयारी है। राजस्थान सहित कई राज्यों से संत भोपाल पहुंच चुके हैं। आयोजन समिति का कहना है कि यह सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि धार्मिक संरचना में किन्नर समाज की औपचारिक भागीदारी की घोषणा है।
धार्मिक और सामाजिक विमर्श का केंद्र बना आयोजन
महाशिवरात्रि के अवसर पर हो रहा यह आयोजन धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श का केंद्र बन गया है। समर्थकों का मानना है कि इससे किन्नर समाज को नई पहचान और स्वीकार्यता मिलेगी, जबकि विरोधी इसे परंपराओं से अलग कदम मान रहे हैं। कुल मिलाकर, भोपाल में होने वाला यह पट्टाभिषेक समारोह देश में ट्रांसजेंडर समुदाय की धार्मिक भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ सकता है।