केंद्रीय बजट 2026 को लेकर अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने बड़ा बयान दिया है। फिच का कहना है कि यह बजट देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने की सरकार की कोशिश को दिखाता है। खास बात यह है कि सरकार ने धीरे-धीरे सरकारी कर्ज कम करने की नीति पर काम जारी रखा है। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास से जुड़े खर्च को भी संतुलन में रखने की कोशिश की गई है, ताकि अर्थव्यवस्था को झटका न लगे।
कर्ज कम करने की कोशिश, लेकिन धीरे-धीरे
फिच के मुताबिक, बजट से यह साफ होता है कि सरकार अचानक बड़े फैसले लेने के बजाय धीरे-धीरे कर्ज की स्थिति सुधारना चाहती है। मजबूत जीडीपी ग्रोथ की वजह से भारत के कर्ज से जुड़े कई संकेतकों में सुधार देखने को मिल रहा है। अगर यही रफ्तार आगे भी बनी रहती है, तो आने वाले समय में देश की कर्ज स्थिति और बेहतर हो सकती है। हालांकि फिच ने यह भी माना कि मौजूदा हालात में तेजी से कर्ज घटाना आसान नहीं है।
राजकोषीय घाटा बना बड़ी चुनौती
रेटिंग एजेंसी ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रखा गया है। यह पिछले साल के 4.4 प्रतिशत से बहुत ज्यादा कम नहीं है। यानी घाटे में कटौती की रफ्तार धीमी ही रहने वाली है। फिच का मानना है कि अगर सरकार घाटा ज्यादा तेजी से कम करने की कोशिश करती है, तो इससे आर्थिक विकास को नुकसान हो सकता है।
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निजी निवेश सुस्त, सरकार उठा रही जिम्मेदारी
फिच के अनुसार भारत में निजी निवेश की रफ्तार अभी भी उतनी तेज नहीं है, जितनी होनी चाहिए। इसी वजह से सरकार ने पूंजीगत खर्च को मजबूत बनाए रखा है। बजट 2026 में कैपेक्स को जीडीपी के करीब 3.1 प्रतिशत पर रखा गया है। इसका मकसद यह है कि जब निजी क्षेत्र निवेश में पीछे है, तब सरकार आगे आकर विकास को सहारा दे सके।
संरचनात्मक सुधारों की कमी पर इशारा
हालांकि फिच ने यह भी कहा कि इस बजट में किसी बड़े स्तर के संरचनात्मक सुधार का ऐलान नहीं हुआ है। एजेंसी को उम्मीद है कि आने वाले समय में सरकार नियमों में ढील और कारोबार को आसान बनाने से जुड़े और सुधार कर सकती है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो लंबी अवधि में विकास की रफ्तार पर असर पड़ सकता है, जो देश के लिए नुकसानदेह होगा।
GDP ग्रोथ का अनुमान, राहत की खबर
फिच रेटिंग्स के निदेशक जेरेमी जूक ने कहा कि यह बजट विकास और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की नीति को दिखाता है। फिच ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.4 प्रतिशत रह सकती है। यह आंकड़ा उम्मीद जगाता है, लेकिन एजेंसी ने साफ किया है कि अगर सुधारों की रफ्तार थमी, तो आगे चलकर विकास और कर्ज दोनों मोर्चों पर नुकसान झेलना पड़ सकता है।