बाराबंकी के बलवीर सिंह ने वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में बैडमिंटन में शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन किया है. 2011 में किडनी फेलियर के बाद जिंदगी थम-सी गई थी, लेकिन 2015 में सोशल मीडिया के जरिए वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स के बारे में जानकर उन्हें एक नई राह मिली.
परिवार का साथ, चुनौतियों से जंग
बलवीर सिंह ने बताया कि शुरू में आर्थिक तंगी बड़ी बाधा बनी. मां ने किडनी देने की कोशिश की, लेकिन मेल न होने से निराशा हाथ लगी. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और परिवार व दोस्तों की मदद से आगे बढ़े.
खेलों में नई शुरुआत, अंतरराष्ट्रीय मंच पर धमक
ट्रांसप्लांट के बाद उन्होंने दोबारा बैडमिंटन खेलना शुरू किया और अर्जेंटीना (2015) व स्पेन (2017) के गेम्स में हिस्सा लिया. 2019 में रीना राजू फाउंडेशन, ऑर्गन इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के संगठनों की मदद से उन्होंने वैश्विक मंच पर कदम रखा.
78 देशों के बीच छाए, चैंपियन बने
वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में 78 देशों के खिलाड़ियों के बीच बलवीर ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और चैंपियनशिप अपने नाम की. उन्होंने इसे जीवन की सबसे बड़ी जीत बताया.
सरकारी समर्थन की अपील
बलवीर सिंह ने कहा कि इस खेल को सरकारी सहयोग नहीं मिलता. उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि इस आयोजन को समर्थन मिले ताकि अधिक लोग जागरूक हों और ऑर्गन डोनेशन को बढ़ावा मिले.