फीफा वर्ल्ड कप जीतना हर फुटबॉलर का सबसे बड़ा सपना होता है, लेकिन कुछ महान खिलाड़ी इस मुकाम तक नहीं पहुंच सके। पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने 2006 से 2026 तक छह विश्व कप खेले, लेकिन एक भी बार ट्रॉफी नहीं जीत पाए। वहीं ब्राजील के नेमार ने चार विश्व कप खेले, लेकिन उनकी टीम भी खिताब से दूर रही। दोनों खिलाड़ियों ने अपने शानदार करियर में कई रिकॉर्ड बनाए, लेकिन विश्व कप जीतने का सपना अधूरा रह गया।
क्रूफ ने बदली फुटबॉल की सोच
नीदरलैंड्स के दिग्गज जोहान क्रूफ को फुटबॉल का सबसे बड़ा रणनीतिक खिलाड़ी माना जाता है। उनकी कप्तानी में नीदरलैंड्स 1974 के विश्व कप फाइनल तक पहुंचा, लेकिन वेस्ट जर्मनी से हार गया। क्रूफ ने खेल की शैली बदल दी, कई बड़े पुरस्कार जीते, लेकिन विश्व कप ट्रॉफी उनके हाथ नहीं लगी।
यूसेबियो और पुस्कास भी रहे खाली हाथ
पुर्तगाल के यूसेबियो ने अपने करियर में 700 से ज्यादा गोल किए और 1966 विश्व कप के सबसे सफल गोल स्कोरर रहे, लेकिन उनकी टीम खिताब नहीं जीत सकी। वहीं हंगरी के फेरेन्क पुस्कास 1954 विश्व कप के फाइनल तक पहुंचे, लेकिन वेस्ट जर्मनी से हार गए। बाद में फीफा ने उनके सम्मान में साल के सर्वश्रेष्ठ गोल पुरस्कार का नाम 'पुस्कास अवॉर्ड' रखा।
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महान खिलाड़ी, लेकिन अधूरी रही सबसे बड़ी जीत
इन सभी खिलाड़ियों ने क्लब और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं, करोड़ों प्रशंसकों का दिल जीता और खेल के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। इसके बावजूद फीफा वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उनके करियर का अधूरा सपना बनकर रह गई। यही वजह है कि फुटबॉल में व्यक्तिगत महानता और विश्व कप जीतना हमेशा एक जैसी बात नहीं मानी जाती।