महज 10 दिनों के भीतर भारत ने यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ ऐसे ट्रेड समझौते किए हैं, जिनका सीधा असर अब शराब बाजार पर दिखने वाला है। अब तक विदेशी शराब पर करीब 150% तक आयात शुल्क लगता था, जिसकी वजह से स्कॉच, बोर्बोन और आयरिश व्हिस्की बेहद महंगी थीं। नए ट्रेड फ्रेमवर्क के बाद यह भारी टैक्स घटकर 30–40% के दायरे में आ सकता है। यही वजह है कि बार और शराब दुकानों में कीमतें तेजी से बदलने की चर्चा शुरू हो गई है।
4500 की बोतल 2500 में कैसे?
अब तक जो विदेशी बोतल दिल्ली-एनसीआर में 4500 से 5000 रुपये में मिलती थी, वह दुबई या सिंगापुर में आधी कीमत पर मिल जाती थी। नए नियम लागू होने के बाद यही बोतलें 2500 से 3000 रुपये तक आ सकती हैं। यानी ग्राहक को सीधे 40% तक की राहत मिल सकती है। टैक्स घटते ही आयात की लागत कम होगी और इसका फायदा सीधा ग्राहकों तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि अलग-अलग राज्यों के एक्साइज टैक्स के कारण कीमतों में थोड़ा फर्क रह सकता है।
स्कॉच बनाम बोर्बोन की टक्कर
यूरोपीय शराब निर्माता अपनी प्रीमियम स्कॉच और आयरिश व्हिस्की के साथ भारतीय बाजार में और आक्रामक होंगे। वहीं अमेरिकी डील के बाद Jack Daniel's और Jim Beam जैसे बोर्बोन ब्रैंड्स सस्ती कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगे। इससे बार मेन्यू में सीधी टक्कर देखने को मिलेगी। जो ग्राहक अब तक सिर्फ स्कॉच को स्टेटस सिंबल मानते थे, वे अब बोर्बोन की तरफ भी झुक सकते हैं।
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बॉटल्ड इन इंडिया से ऑरिजिन तक
अब तक ज्यादा टैक्स से बचने के लिए कंपनियां विदेश से स्पिरिट कन्सन्ट्रेट मंगाकर भारत में बोतलबंदी करती थीं, जिसे “बॉटल्ड इन इंडिया” कहा जाता था। टैक्स कम होते ही अब सीधा विदेश में तैयार बोतलें भारत आएंगी। यानी “बॉटल्ड इन ओरिजिन” का दौर शुरू होगा। इससे ग्राहकों को ज्यादा शुद्ध और असली स्वाद मिलेगा और मिलावट या लोकल मिक्स की शिकायतें भी कम होंगी।
ग्राहकों के लिए फायदे ही फायदे
कीमत कम होने से बार कल्चर में तेजी आएगी। ज्यादा लोग प्रीमियम शराब ट्राई कर पाएंगे। होटल और पब सेक्टर को भी फायदा होगा क्योंकि विदेशी ब्रैंड्स अब ज्यादा किफायती मेन्यू में शामिल किए जा सकेंगे। साथ ही सरकार को वॉल्यूम बढ़ने से टैक्स कलेक्शन में भी नुकसान नहीं होने की उम्मीद है।
स्वदेशी ब्रैंड्स के लिए चुनौती
हालांकि यह खबर हर किसी के लिए जश्न जैसी नहीं है। Amrut Distilleries और Indri Single Malt जैसे भारतीय प्रीमियम ब्रैंड्स के लिए मुकाबला कठिन हो सकता है। जब विदेशी बोर्बोन और स्कॉच उन्हीं कीमतों में मिलने लगेंगी, तो ग्राहक क्या चुनेंगे, यह बड़ा सवाल है। आने वाले महीनों में असली तस्वीर साफ होगी, लेकिन इतना तय है कि शराब बाजार में बड़ा बदलाव शुरू हो चुका है।