
Former DGP Mohammad Mustafa: हरियाणा के पंचकूला में पंजाब के पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा के बेटे अकील मुस्तफा की मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अकील के निधन के कुछ दिन बाद पुलिस ने पूर्व डीजीपी, उनकी पत्नी और दो अन्य परिवारजनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई तब हुई जब अकील के मोबाइल फोन से मिला एक वीडियो सामने आया, जिसमें उसने अपने परिवार के कुछ सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब पुलिस ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है।
वीडियो से बदला केस का रुख
अकील की 16 अक्टूबर 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। शुरुआती जांच में इसे ड्रग ओवरडोज से हुई मौत बताया गया था। परिवार ने भी किसी तरह की आपराधिक साजिश की संभावना से इनकार किया था। हालांकि, बाद में जब उसके फोन से एक लंबा वीडियो मिला, तो पुलिस ने केस को नए सिरे से खोल दिया। उस वीडियो में अकील ने दावा किया था कि उसे अपने परिवार से खतरा है और कुछ लोग उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। पुलिस ने वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसमें कोई छेड़छाड़ नहीं हुई।
पुलिस ने शुरू की गहन जांच
डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए एक एसीपी-रैंक अधिकारी की देखरेख में एसआईटी बनाई गई है। टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वह पूरे मामले की वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच करे। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ड्रग्स ओवरडोज बताया गया है, लेकिन वीडियो के सामने आने के बाद अब सभी पहलुओं की जांच जरूरी हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल्स और बैंक रिकॉर्ड्स की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना से पहले और बाद में अकील के संपर्क में कौन-कौन लोग थे।
पूर्व DGP बोले
पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा ने अपने बेटे के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि उन्होंने खुद पुलिस जांच का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, “मैं कानून में विश्वास रखता हूं। अगर कोई आरोप है, तो पुलिस को जांच करनी चाहिए। मेरे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।” मुस्तफा ने यह भी कहा कि अकील लंबे समय से ड्रग्स की समस्या से जूझ रहा था और संभवतः उसी के प्रभाव में उसने वीडियो रिकॉर्ड किया।
इस बीच, पंचकूला पुलिस ने बताया कि परिवार के सभी सदस्यों से पूछताछ की जाएगी और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल, मृतक के मोबाइल और लैपटॉप से मिले डेटा को सुरक्षित रखा गया है। अधिकारी मानते हैं कि यह केस बेहद संवेदनशील है और जल्दबाज़ी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा जा सकता।