Former IAS Arvind Joshi: भोपाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व IAS अधिकारी अरविंद जोशी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने लगभग 5 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत अस्थायी रूप से जब्त किया है। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े लंबे समय से चल रहे मामले में की गई है।
लोकायुक्त की FIR से शुरू हुई जांच
ईडी की जांच लोकायुक्त पुलिस भोपाल द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। एफआईआर में आरोप है कि अरविंद जोशी ने अपने सेवा काल के दौरान ज्ञात आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह अतिरिक्त संपत्ति कई वर्षों में एकत्र की गई थी और इसकी कुल अनुमानित कीमत 41 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
परिवार और सहयोगियों के नाम पर निवेश
जांच में सामने आया कि कथित अवैध आय को छिपाने के लिए संपत्तियां परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों के नाम पर खरीदी गईं। ईडी का दावा है कि कुछ संपत्तियां एसपी कोहली और उसके परिवार से जुड़े नामों पर दर्ज पाई गईं, जिससे असली स्वामित्व को छिपाने की कोशिश की गई।
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शेल कंपनी के जरिए छिपाई गई संपत्ति
ईडी की जांच में एक शेल कंपनी की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि इस कंपनी के नाम पर कई संपत्तियां खरीदी गईं। दस्तावेजों में एसपी कोहली को कंपनी का मैनेजर दिखाया गया और पावर ऑफ अटॉर्नी देकर संपत्तियों पर नियंत्रण रखा गया, ताकि वास्तविक लाभार्थी की पहचान न हो सके।
रिसॉर्ट और जमीन भी शामिल
जब्त की गई संपत्तियों में भोपाल जिले के आवासीय प्लॉट, कृषि भूमि और एक संचालित रिसॉर्ट शामिल हैं। ईडी के अनुसार, ये सभी संपत्तियां अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई थीं। इससे पहले भी इस मामले में तीन बार संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं और अब तक कुल जब्ती का आंकड़ा करीब 8.5 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।