पश्चिम बंगाल की राजनीति के एक बड़े चेहरे, पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का कोलकाता में निधन हो गया है। वह 71 वर्ष के थे और पिछले कई महीनों से कोमा में थे। उनका निधन रविवार देर रात 1:30 बजे कोलकाता के अपोलो हॉस्पिटल में हुआ मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और लंबे समय तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे। उन्होंने 2017 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की थी, लेकिन 2021 में फिर से तृणमूल कांग्रेस में लौट आए।
मुकुल रॉय के निधन पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य राजनीतिक नेताओं ने शोक जताया है। मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और लंबे समय तक ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे। उन्होंने 2017 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की थी, लेकिन 2021 में फिर से तृणमूल कांग्रेस में लौट आए।
मुकुल रॉय की राजनीतिक उपलब्धियां
उन्होंने 2011 से 2012 तक रेल मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने 2009 से 2011 तक शिपिंग मंत्री के रूप में कार्य किया। वे 2006 से 2017 तक तृणमूल कांग्रेस के महासचिव रहे। वे 2006 से 2012 तक राज्यसभा के सदस्य रहे।
टीएमसी और भाजपा में दोनों में रहे
2010 के दशह में TMC के साथ उनके रिश्ते बिगड़ गए थे। उस समय शारदा चिटफंड घोटाले जैसे मामले सामने आए थे। इसके बाद वे टीएमसी से दूर हो ए। फरवरी 2015 में पार्टी ने उन्हें नेशनल जनरल सेक्रेटरी पद से हटा दिया था। सितंबर 2017 में उन्होंने TMC से इस्तीफा दिया। नवंबर 2017 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़ गए। बातर में जून 2021 में वे दोबारा TMC में फिर लौट आए।
राजनीतिक गलियारों में शोक
पश्चिम बंगाल की राजनीति में वे 'बंगाल के चाणक्य' कहे जाते रहे हैं। मुकुल रॉय के निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है। उनके जाने से TMC को गहरा झटका लगा है।