नोएडा/जेवर। 28 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का औपचारिक उद्घाटन हो चुका है। दुनिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शुमार होने जा रहे इस प्रोजेक्ट की असली कहानी 25 साल पुरानी है। और उसकी शुरुआत हुई थी खुर्जा लोकसभा क्षेत्र के तत्कालीन सांसद अशोक प्रधान की एक चिट्ठी से।
अशोक प्रधान, जो 1996 से 2009 तक खुर्जा लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे, ने दैनिक लोकसत्य को दिए एक विशेष इंटरव्यू में खुलासा किया कि जेवर एयरपोर्ट का पहला औपचारिक प्रस्ताव उन्होंने ही अटल जी के सामने रखा था।“मैं अटल जी के पास जेवर में एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव लेकर गया था”अशोक प्रधान बताते हैं कि सूखे के उस दौर में वे औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ राहत राशि लेकर अटल बिहारी वाजपेयी से मिलने गए थे। उसी बैठक में उन्होंने जेवर (तब गौतम बुद्ध नगर का हिस्सा, खुर्जा लोकसभा क्षेत्र में आता था) में एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव रखा और अटल जी को औपचारिक पत्र भी सौंपा। अटल जी ने तुरंत सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार से प्रस्ताव पारित कराकर लाया जाए। उस समय उत्तर प्रदेश में राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार थी। राजनाथ सिंह सरकार ने एयरपोर्ट प्रस्ताव को मंजूरी दी और केंद्र को भेजा। इस पूरी प्रक्रिया में समय लगा। लेकिन 2004 में केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनते ही यह प्रस्ताव अधर में लटक गया।
2009 से पहले नोएडा- जेवर खुर्जा क्षेत्र में आता था
महत्वपूर्ण बात यह है कि 2009 के लोकसभा परिसीमन से पहले वर्तमान जेवर क्षेत्र खुर्जा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा था। इसलिए अशोक प्रधान ही उस क्षेत्र के सांसद थे और उन्होंने इस प्रोजेक्ट की नींव रखी।उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्पष्ट किया कि यह परियोजना वर्ष 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय से लंबित पड़ी थी। 2014 के बाद भी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार होने के कारण इसे खास तवज्जो नहीं मिल पाई।
अखिलेश यादव ने तो प्रस्ताव को आगरा-फिरोजाबाद शिफ्ट करने की बात कही थी।
मायावती और अखिलेश के दावों पर सच्चाई
तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 2011 में प्रस्ताव केंद्र को भेजने का दावा किया है। उन्होंने यह प्रस्ताव भेजा था, तब कांग्रेस ने तवज्जो नही दी। अखिलेश यादव ने भी दादरी रैली में जेवर एयरपोर्ट के लिए एनओसी देने का जिक्र किया। लेकिन हकीकत यह है कि प्रोजेक्ट को असली पंख 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार के सत्ता में आने और केंद्र-राज्य की डबल इंजन सरकार बनने के बाद ही लगे।पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. महेश शर्मा (गौतम बुद्ध नगर सांसद) ने नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री के नाते पर्यावरण और अन्य मंजूरियों में आ रही बाधाओं को दूर करने में अहम भूमिका निभाई। तत्कालीन जिलाधिकारी बी. एन सिंह और जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने जमीन अधिग्रहण में तेजी दिखाई। तब से लेकर 2025 तक इस प्रोजेक्ट में यमुना प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ डॉ अरुण वीर सिंह और उद्घाटन तक एयरपोर्ट के नोडल अफसर शैलेन्द्र भाटिया की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इत्तेफाक या संयोग?
17 अप्रैल 1976 को नोएडा की स्थापना हुई थी। 17 अप्रैल 2026 को नोएडा को 50 साल पूरे हो जाएंगे। ठीक उसी समय प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 28 मार्च 2026 को जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन कर नोएडा का नाम वैश्विक मानचित्र पर चमक उठा है।जेवर की इस पट्टी पर भारत की उड़ान का रनवे तैयार करने में अशोक प्रधान द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी को दी गई पहली चिट्ठी आज भी उसकी ऐतिहासिक शुरुआत के रूप में याद की जाएगी। 25 साल का लंबा सफर आखिरकार पूरा हुआ है।