फ्रांस की राजनीति में अचानक हलचल मची है क्योंकि प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नु ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। यह इस्तीफा उस समय आया है जब लेकोर्नु ने सिर्फ़ एक दिन पहले नया मंत्रिमंडल घोषित किया था, और वह एक महीने से भी कम समय तक प्रधानमंत्री रहे। इस बीच, उनके फैसलों की आलोचना हो रही है, और राजनीतिक विरोधी बल नए चुनाव या राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
मंत्री-चयन पर तीखी प्रतिक्रिया
लेकोर्नु के मंत्री चयन ने व्यापक विवाद उत्पन्न कर दिया। विशेष रूप से, पूर्व वित्त मंत्री को रक्षा मंत्रालय सौंपने का निर्णय विवादास्पद साबित हुआ। इसके अलावा, अन्य महत्वपूर्ण पदों में बहुत बदलाव नहीं किया गया। आंतरिक मंत्री, न्याय मंत्री और विदेश मंत्री के पदों पर पहले से रहे नामों को ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ दी गईं, जिससे बदलाव की उम्मीदें अधूरी रहीं।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
इस इस्तीफे के तुरंत बाद विपक्षी दल सक्रिय हो गए हैं। दक्षिणपंथी दल ने तत्काल नए चुनाव कराने की मांग की है, जबकि वामपंथी दल ने राष्ट्रपति से इस्तीफा देने का आह्वान किया है। राजनीतिक दलों का मानना है कि वर्तमान स्थिति में नेतृत्व की जवाबदेही जरूरी है, और जनता के लिए स्थिरता की गारंटी देने वाला कोई व्यक्तित्व सामने नहीं आ रहा।
राजनीतिक स्थिति की व्यापकता
राजनीतिक विभाजन गहराता जा रहा है। राष्ट्रीय सभा में विपक्षी दलों की पकड़ मजबूत हो चुकी है, जबकि राष्ट्रपति समर्थक दलों के लिए राह कठिन होती जा रही है। जनता बीच में है, जो परिवर्तन चाहती है लेकिन ये स्पष्ट नहीं कि अगली कदम क्या होगा।