लखनऊ । उत्तर प्रदेश तेजी से देश का सबसे बड़ा डिजिटल डेस्टिनेशन बनने की राह पर है। राज्य सरकार की निवेशक-मित्र नीतियों का कमाल देखिए कि आईटी, स्टार्टअप और डेटा सेंटर सेक्टर में कुल 14 हजार करोड़ रुपये का निवेश फाइनल हो चुका है, जो न केवल लाखों नौकरियां पैदा करेगा, बल्कि यूपी को राष्ट्रीय टेक हब के रूप में स्थापित कर देगा।
नीतियों ने निवेशकों को किया आकर्षित
सीएम योगी की अगुवाई में ये निवेश इन्फोसिस, एडोब, आईबीएम और टेलीपरफॉर्मेंस जैसे वैश्विक दिग्गजों के आने से और मजबूत हो रहे हैं। यूपी सरकार की डेटा सेंटर पॉलिसी 2021 और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2020 ने निवेशकों को खींच लिया है। हाल ही में सितंबर 2025 के बाद तीन बड़े प्रस्तावों से ही 868 करोड़ रुपये का निवेश और 7,800 नौकरियां सुनिश्चित हो गईं। कुल मिलाकर, डेटा सेंटर सेक्टर में ही हिरणंदानी ग्रुप, एनटीटी ग्लोबल, वेब वर्क्स, अदानी एंटरप्राइजेज और एसटी टेलीमीडिया जैसे दिग्गजों ने 21,342 करोड़ रुपये के निवेश की पेशकश की है, जो करीब 10,000 नौकरियां पैदा करेगा। लेकिन यहीं नहीं रुकना है। सरकार का टारगेट 30,000 करोड़ रुपये का निवेश है, जिसमें 900 मेगावाट क्षमता वाले 8 प्राइवेट डेटा सेंटर पार्क शामिल हैं।
इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में 40,000 करोड़ रुपये का निवेश और 4 लाख नौकरियां अपेक्षित हैं। नीतियों के तहत कैपिटल, लैंड और बिजली पर सब्सिडी मिल रही है। कुल 14,000 करोड़ के निवेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूत झटका लगा है। यूपी स्टार्टअप पॉलिसी के तहत इंसेंटिव्स और सपोर्ट से हजारों युवा उद्यमी उभर रहे हैं। 2023 में ही आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में 1.85 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आ चुके थे, जिनमें से 1 लाख करोड़ के एमओयू साइन हो गए।
वैश्विक दिग्गजों का झुंड
इन्फोसिस से आईबीएम तक की एंट्रीयूपी अब सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि काम का टेक हब बन रहा है। इन्फोसिस ने सेक्टर-85, नोएडा में 1,400 करोड़ रुपये का आईटी पार्क प्रोजेक्ट लॉन्च किया है, जो 27.5 एकड़ में फैला होगा। यह 2.7 मिलियन स्क्वायर फीट का कैंपस 5,000 कर्मचारियों को जगह देगा और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी पर फोकस करेगा। एडोब, आईबीएम और टेलीपरफॉर्मेंस जैसे नाम भी राज्य में निवेश कर रहे हैं, जो आर्थिक प्रगति को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। इन कंपनियों से लाखों जॉब्स का वादा है। पहले से ही माइक्रोसॉफ्ट का डेटा सेंटर, टीसीएस, पेटीएम, एचसीएल, विप्रो, एमएक्यू और एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स जैसे नाम यूपी में सक्रिय हैं। नोएडा-ग्रेटर नोएडा को आईटी हब, लखनऊ को एआई-एमएल सेंटर बनाया जा रहा है।
कनपुर, वाराणसी और प्रयागराज भी इनोवेशन हब्स के रूप में उभर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, "यूपी को डेटा सेंटर, स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में ग्लोबल लीडर बनना है। यह निवेश सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं। इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 2017-18 के 3,862 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 44,744 करोड़ हो गया, जबकि आईटी एक्सपोर्ट 55,711 करोड़ से 82,055 करोड़ तक पहुंचे। सेमीकंडक्टर सेक्टर में एक प्रोजेक्ट अप्रूव हो चुका है, दो और केंद्रीय सहयोग से लाइन में हैं। हिरणंदानी का 28,440 करोड़ का फैब प्लांट और वामा सुंदरी का 3,706 करोड़ का प्रोजेक्ट यूपी को चिप मैन्युफैक्चरिंग हब बनाएंगे।
बाक्स- स्टार्टअप्स में सुधरी है राष्ट्रीय रैंकिंग
सरकार युवाओं को डिजिटल इकोनॉमी में जोड़ने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम चला रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स पॉलिसी के तहत 67 प्रस्तावों से 15,477 करोड़ का निवेश और 1.48 लाख जॉब्स का लक्ष्य है, जिसमें 430 करोड़ के इंसेंटिव्स अप्रूव हो चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी की विजन से यूपी 5 साल में 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर बढ़ रहा है। एआई सिटी लखनऊ में बनेगी, जो इनोवेशन का नया केंद्र बनेगी। निवेशकों को इंसेंटिव्स में देरी न हो, इसके लिए डिपार्टमेंटल अकाउंटेबिलिटी तय की गई है। युवा, महिलाएं और ग्रामीण क्षेत्र इस डिजिटल वेव में शामिल हो रहे हैं। कुल मिलाकर, ये 14 हजार करोड़ का निवेश यूपी को न सिर्फ जॉब्स का खजाना बनाएगा, बल्कि ग्लोबल टेक मैप पर चमकाएगा।