हिंदू धर्म में देवी-देवताओं और पितरों की तस्वीरें केवल सजावट नहीं होतीं, बल्कि इन्हें सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार सही दिशा, स्थान और नियमों के साथ लगाई गई तस्वीरें घर में सुख, शांति और समृद्धि लाती हैं। वहीं, यदि अनजाने में गलत स्थान पर तस्वीर लगा दी जाए तो मानसिक अशांति, तनाव और बाधाओं का सामना भी करना पड़ सकता है। इसलिए तस्वीर लगाने से पहले कुछ जरूरी वास्तु बातों को जानना बेहद आवश्यक है।
देवी-देवताओं की तस्वीर लगाने के सही नियम
देवी-देवताओं की तस्वीर या मूर्ति लगाने के लिए घर का पूजा स्थल सबसे उपयुक्त माना जाता है। वास्तु के अनुसार पूजा कक्ष या मंदिर उत्तर-पूर्व दिशा में होना श्रेष्ठ होता है। तस्वीरें दीवार से थोड़ी ऊंचाई पर लगानी चाहिए और बहुत ज्यादा संख्या में तस्वीरें लगाने से बचना चाहिए। टूटी, फटी या धुंधली तस्वीरें कभी नहीं लगानी चाहिए, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं। शयनकक्ष में देवी-देवताओं की तस्वीर लगाने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है।
पितरों की तस्वीरें कहां और कैसे लगाएं
पितरों या पूर्वजों की तस्वीरें सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक होती हैं, लेकिन इन्हें लगाने के लिए भी वास्तु नियम होते हैं। पितरों की तस्वीरें हमेशा दक्षिण दिशा की दीवार पर लगानी चाहिए, क्योंकि यह दिशा पितृ लोक से जुड़ी मानी जाती है। पूजा स्थल में पितरों की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए और न ही इन्हें बेडरूम या किचन में रखना उचित माना जाता है। तस्वीरें साफ-सुथरी और व्यवस्थित होनी चाहिए, जिससे घर में सकारात्मक स्मृतियां बनी रहें।
किन बातों का विशेष ध्यान रखें
घर में तस्वीरें लगाते समय यह ध्यान रखें कि वे एक-दूसरे के ऊपर या बहुत भीड़ में न हों। देवी-देवताओं और पितरों की तस्वीरें एक ही दीवार पर आमने-सामने नहीं लगानी चाहिए। नियमित रूप से तस्वीरों की साफ-सफाई करना भी जरूरी माना जाता है, क्योंकि धूल और गंदगी नकारात्मकता को बढ़ाती है। साथ ही, तस्वीरों के सामने अनादर या अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए।