Vande Bharat to Pamban Bridge: संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के सांस्कृतिक मूल्यों, विकास योजनाओं और भविष्य की प्राथमिकताओं पर विस्तार से बात की। अपने लगभग एक घंटे के अभिभाषण में उन्होंने राष्ट्रगीत से लेकर आधुनिक अवसंरचना तक का उल्लेख किया। खास बात यह रही कि पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल जैसे चुनावी राज्यों के विकास कार्यों और वहां की महान विभूतियों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
वंदे मातरम् का जिक्र
राष्ट्रपति ने कहा कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को नमन करते हुए कहा कि यह गीत देशवासियों को एक सूत्र में बांधने की प्रेरणा देता है। साथ ही रवींद्रनाथ टैगोर के विचारों का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्भरता को सच्ची आजादी का आधार बताया।
विकास की नई पहचान
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने असम का एक से अधिक बार उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि असम न केवल सांस्कृतिक विरासत की भूमि है, बल्कि अब तकनीकी और औद्योगिक विकास की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है। सेमीकंडक्टर, कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट्स पूर्वोत्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं।
आधुनिक भारत की तस्वीर
राष्ट्रपति ने वंदे भारत ट्रेनों के बढ़ते नेटवर्क को देश की प्रगति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की वंदे भारत ट्रेनें और बंगाल-असम के बीच स्लीपर सेवाएं रेल क्षेत्र में नई उपलब्धि हैं। इसके साथ ही तमिलनाडु में बने नए पंबन ब्रिज को अवसंरचना क्षेत्र की बड़ी सफलता बताया।
लॉजिस्टिक हब की ओर राज्य
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इनलैंड वॉटरवेज और राष्ट्रीय जलमार्गों के विस्तार से पूर्वी भारत के कई राज्य लॉजिस्टिक हब के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने पूर्वोदय की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर क्षेत्र अब विकास की नई संभावनाओं के केंद्र बनते जा रहे हैं।