FSSAI Warning Label Rules : अगर आप चिप्स, बिस्किट, नमकीन या सॉफ्ट ड्रिंक खरीदते समय यह समझ नहीं पाते कि कौन सा प्रोडक्ट आपकी सेहत के लिए ठीक है और कौन सा नुकसान पहुंचा सकता है, तो अब यह काम काफी आसान होने वाला है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) एक नई लेबलिंग व्यवस्था लाने की तैयारी में है। इसके तहत ज्यादा चीनी, नमक और संतृप्त फैट वाले पैकेज्ड फूड पर लाल रंग का विशेष चेतावनी लेबल लगाना अनिवार्य किया जाएगा। इससे ग्राहक खरीदारी के समय ही उत्पाद की गुणवत्ता और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिम को समझ सकेंगे।
कनाडा मॉडल पर आधारित होगी व्यवस्था
FSSAI का यह प्रस्ताव कनाडा समेत कई विकसित देशों में लागू चेतावनी लेबलिंग सिस्टम से प्रेरित है। इन देशों में ऐसे खाद्य उत्पादों पर विशेष चेतावनी चिन्ह लगाए जाते हैं जिनमें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्व अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं। भारत में भी अब पैकेट के सामने वाले हिस्से पर लाल रंग का षट्कोणीय चेतावनी चिन्ह लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को बिना बारीक जानकारी पढ़े ही यह समझाना है कि उत्पाद में चीनी, नमक या फैट तय सीमा से अधिक है।
क्या लिखा होगा चेतावनी लेबल पर?
नए नियम के तहत अगर किसी खाद्य पदार्थ में शुगर, नमक या सैचुरेटेड फैट की मात्रा निर्धारित सीमा से ज्यादा होगी तो उसके पैकेट पर स्पष्ट रूप से "High in Sugar" या "High in Salt/Saturated Fat" जैसी चेतावनी लिखी जाएगी। यह लाल रंग का चिन्ह दूर से ही दिखाई देगा ताकि ग्राहक तुरंत पहचान सकें कि उत्पाद स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। खासतौर पर चिप्स, बिस्किट, नमकीन, प्रोसेस्ड स्नैक्स और एयरेटेड ड्रिंक्स जैसी वस्तुएं इस नियम के दायरे में आ सकती हैं।
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बढ़ती बीमारियों पर लगाम लगाने की कोशिश
देश में तेजी से बढ़ रहे मोटापे, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों को देखते हुए FSSAI ने यह कदम उठाया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से पैकेज्ड फूड में मौजूद अधिक नमक, चीनी और खराब फैट को इन बीमारियों की बड़ी वजह मानते रहे हैं। नए नियम का मकसद लोगों को खरीदारी के समय ही जागरूक करना है ताकि वे बेहतर विकल्प चुन सकें और अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का सेवन कम हो।
कंपनियों पर भी पड़ेगा असर
इस व्यवस्था का असर सिर्फ ग्राहकों पर ही नहीं बल्कि खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों पर भी पड़ सकता है। माना जा रहा है कि चेतावनी लेबल लगने के बाद कंपनियां अपने उत्पादों में चीनी, नमक और फैट की मात्रा कम करने की दिशा में कदम उठा सकती हैं। इससे बाजार में ज्यादा हेल्दी उत्पाद उपलब्ध होने की संभावना बढ़ेगी। कई देशों में ऐसे नियम लागू होने के बाद कंपनियों ने अपने फॉर्मूले में बदलाव भी किए हैं।
ग्राहकों को मिलेगा सही फैसला लेने का मौका
अब तक अधिकतर लोग पैकेट के पीछे लिखी न्यूट्रिशन जानकारी को ध्यान से नहीं पढ़ते थे। लेकिन पैकेट के सामने लाल चेतावनी चिन्ह होने से बच्चों, युवाओं और अभिभावकों के लिए सही उत्पाद चुनना आसान हो जाएगा। डायबिटीज, बीपी और हृदय रोग से जूझ रहे लोग भी अपनी जरूरत के हिसाब से खाद्य पदार्थ चुन सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लोगों को जंक फूड के प्रति जागरूक करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मददगार साबित हो सकता है।