भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (एफटीए) को दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों में एक अहम बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस समझौते से कपड़ा, आयुर्वेद, कृषि, प्रोसेस्ड फूड, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, रत्न-आभूषण और हस्तशिल्प जैसे कई क्षेत्रों को बड़ी उम्मीदें हैं।
भारतीय सामान ज्यादा किफायती और प्रतिस्पर्धी बनेंगे
उद्योग जगत और विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में बेहतर मौके मिलेंगे। कई उत्पादों पर टैरिफ में कमी या पूरी छूट मिलने से भारतीय सामान ज्यादा किफायती और प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
टैरिफ और नियमों को लेकर पहले से साफ
भारत-यूके एफटीए (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) से जुड़ी उम्मीदों पर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, "कोई भी व्यापार समझौता सिर्फ व्यापार बढ़ाने का जरिया नहीं होता। जब ऐसा समझौता होता है, तो दोनों देशों के बीच टैरिफ और नियमों को लेकर पहले से साफ और भरोसेमंद व्यवस्था बन जाती है। हमारा मानना है कि ऐसे व्यापार समझौते दोनों देशों में निवेश बढ़ाने में भी मदद करेंगे। इससे न सिर्फ दोनों देशों के बीच सप्लाई चेन मजबूत होगी, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भी नए मौके बनेंगे। साथ ही, भारतीय कारोबारों के लिए दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने के नए रास्ते भी खुलेंगे।"
48 अरब पाउंड के व्यापारिक रिश्ते
भारत में ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरून ने कहा कि हमारा महत्वपूर्ण एफटीए, जिसे सीईटीए भी कहा जाता है, आज से लागू हो गया है। इससे ब्रिटेन और भारत के बीच पहले से ही लगभग 48 अरब पाउंड के व्यापारिक रिश्ते को मजबूती मिलेगी। इस समझौते से दोनों देशों के बीच रोजमर्रा का व्यापार सस्ता, तेज और आसान हो जाएगा। इस समझौते से भारत और ब्रिटेन दोनों की जीडीपी में करीब पांच अरब पाउंड तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
पहले के मुकाबले कम आयात शुल्क लगेगा
लिंडी कैमरून ने कहा कि आज से हमारी अर्थव्यवस्थाओं, हमारे कारोबारों और सबसे बढ़कर हमारे लोगों को इस व्यापार समझौते का फायदा मिलना शुरू हो जाएगा। भारत से ब्रिटेन जाने वाले 99 प्रतिशत सामान पर अब कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा, जबकि ब्रिटेन से भारत आने वाले 90 प्रतिशत उत्पाद या तो पूरी तरह शुल्क-मुक्त होंगे या उन पर पहले के मुकाबले कम आयात शुल्क लगेगा।