यूरोपीय यूनियन के 27 देशों के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता होने और अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% करने के बाद हस्तशिल्प निर्यातकों में उत्साह दिख रहा है। निर्यातकों का मानना है कि इससे भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी। हालांकि वे यह भी कह रहे हैं कि सिर्फ शुल्क कम होने से काम नहीं चलेगा, गुणवत्ता और डिजाइन पर लगातार मेहनत करनी होगी।
डिजाइन और क्वालिटी पर रहेगा फोकस
हस्तशिल्प निर्यात से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका और यूरोपीय बाजार बेहद मांग वाले हैं। वहां के ग्राहक हर बार कुछ नया और अलग चाहते हैं। डिजाइन में विविधता और बेहतरीन फिनिशिंग जरूरी है। अगर उत्पाद की गुणवत्ता मजबूत नहीं होगी तो बाजार में टिकना मुश्किल होगा। इसलिए निर्यातकों को लगातार इनोवेशन और बेहतर प्रस्तुति पर ध्यान देना होगा।
चीन के मुकाबले मिला शुल्क लाभ
अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटकर 18% होने से भारतीय निर्यातकों को चीन के मुकाबले फायदा मिला है। चीन से आने वाले समान उत्पादों पर अभी भी करीब 35% शुल्क लगता है। इस तरह भारत को करीब 17% का सीधा लाभ मिल रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की असली ताकत ‘हाथ से बने’ उत्पाद हैं। मशीन आधारित उत्पादन में चीन से मुकाबला मुश्किल है, इसलिए भारतीय कारीगरी को ही ब्रांड बनाना होगा।
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दिल्ली फेयर में 109 देशों की भागीदारी
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में 14 से 18 फरवरी तक होने वाले 61वें दिल्ली फेयर स्प्रिंग 2026 में 109 देशों के खरीदार शामिल होंगे। अब तक करीब 3,500 विदेशी और 4,000 घरेलू खरीदारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। आयोजकों का मानना है कि यह फेयर भारतीय हस्तशिल्प के लिए बड़ा मंच साबित होगा।
3,000 से ज्यादा निर्यातक होंगे शामिल
इस बार मेले में 17 हॉल में 3,000 से अधिक निर्यातक अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। खासतौर पर हाथ से बने फर्नीचर पर विशेष जोर रहेगा। चार हॉल में करीब 10,000 वर्गमीटर क्षेत्र में 350 से ज्यादा फर्नीचर निर्यातकों को जगह दी गई है। साथ ही यंग डिजाइनर्स और क्षेत्रीय कारीगरी को भी प्रमुखता दी जा रही है।
33 हजार करोड़ से ज्यादा का निर्यात
साल 2024-25 में भारत से 33,123 करोड़ रुपये के हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात हुआ। इससे करीब 3,918 मिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा देश को मिली। होम डेकोर, फर्नीचर, लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स और फैशन ज्वैलरी इसमें प्रमुख रहे। अब FTA और टैरिफ कटौती के बाद उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है।