पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों की यात्रा पर भी दिखाई दे सकता है। ट्रांसपोर्ट से जुड़े संगठनों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती लागत ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बस किराए और माल ढुलाई दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। इसका असर रोजमर्रा की यात्रा से लेकर पर्यटन और धार्मिक यात्राओं तक पड़ सकता है।
बस किराए पर पड़ सकता है असर
ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि उनकी कुल परिचालन लागत का बड़ा हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है। बढ़ती लागत के कारण बस किराए में लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। खासतौर पर लंबी दूरी की यात्राएं और पर्यटन मार्ग इससे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
ढुलाई दरों पर भी दबाव
सिर्फ बस सेवाएं ही नहीं बल्कि माल ढुलाई क्षेत्र पर भी इसका असर पड़ सकता है। ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि लंबी दूरी, ईंधन खर्च और अन्य बढ़ती लागत के कारण ढुलाई दरों में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है। इसका असर बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
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ट्रांसपोर्टरों ने रखीं मांगें
ट्रांसपोर्ट संगठनों ने सरकार के सामने कुछ मांगें भी रखी हैं। इनमें बस और ट्रकों के लिए टोल टैक्स में राहत और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग शामिल बताई जा रही है। उनका कहना है कि इससे कुछ राहत मिल सकती है और किराए में बढ़ोतरी रोकी जा सकती है।
धार्मिक और पर्यटन यात्रा पर असर
बद्रीनाथ, केदारनाथ, शिमला-मनाली जैसे लोकप्रिय पर्यटन और धार्मिक मार्गों पर भी असर की बात कही जा रही है। कई यात्राओं की बुकिंग पहले से हो चुकी है और लागत बढ़ने की स्थिति में किराया बढ़ाना मजबूरी बन सकता है।
आम लोगों की बढ़ सकती है चिंता
अगर ईंधन की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो इसका असर आम लोगों के बजट पर भी पड़ सकता है। पहले से बढ़ती महंगाई के बीच यात्रा और परिवहन खर्च बढ़ना लोगों के लिए नई चुनौती बन सकता है। आने वाले दिनों में सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर नजर रहेगी।