पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने से सरकारी तेल कंपनियों पर भारी दबाव बन गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनियों को हर दिन हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में अब माना जा रहा है कि देश में पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की कीमतों में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
कच्चे तेल में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है जबकि अमेरिकी क्रूड डब्ल्यूटीआई भी 99 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना हुआ है। हाल ही में कच्चा तेल 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता ने पूरी दुनिया के तेल बाजार में चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है।
कितने बढ़ सकते दाम
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 15 मई के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 40 से 50 रुपये तक का इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार राजकोषीय दबाव कम करने के लिए ईंधन की कीमतों में बदलाव कर सकती है। हालांकि अचानक बड़ा झटका देने के बजाय चरणबद्ध तरीके से दाम बढ़ाने की तैयारी हो सकती है।
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आम लोगों पर असर
ईंधन महंगा होने का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसका असर पूरे बाजार पर दिखाई देता है। माल ढुलाई महंगी होने से फल सब्जियों और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। इसके अलावा कैब ऑटो और हवाई यात्रा का खर्च भी बढ़ने की आशंका है। रसोई गैस महंगी होने से मध्यम वर्गीय परिवारों का घरेलू बजट और ज्यादा प्रभावित हो सकता है।
सरकार की चिंता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हाल के दिनों में ईंधन बचाने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर घर से काम करने जैसे विकल्प अपनाने को कहा था। सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल और 60 प्रतिशत एलपीजी विदेशों से आयात करता है। ऐसे में वैश्विक संकट का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
आगे क्या होगा
अब देशभर के लोगों की नजर सरकार और तेल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी हुई है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं तो आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार धीरे धीरे कीमतों में बदलाव कर सकती है ताकि आम लोगों पर अचानक बड़ा बोझ न पड़े लेकिन राहत मिलती अभी दिखाई नहीं दे रही है।