देश में एक बार फिर महंगाई की चिंता बढ़ती दिख रही है। सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई और उसके अगले ही दिन सीएनजी भी महंगी हो गई। पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ, जबकि सीएनजी की कीमत में भी 2 रुपये प्रति किलो तक का इजाफा हुआ है। लगातार बढ़ रही ईंधन कीमतों का असर अब सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिख सकता है।
सब्जी से किराना तक बढ़ सकता है खर्च
डीजल महंगा होने का सबसे बड़ा असर माल ढुलाई पर पड़ता है। देशभर में ट्रक और मालवाहक वाहन बड़े पैमाने पर डीजल से चलते हैं। जब ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ता है तो फल, सब्जियां और रोजमर्रा की चीजें बाजार तक पहुंचाने की लागत भी बढ़ जाती है। ऐसे में टमाटर, आलू, प्याज, हरी सब्जियां और फलों के दाम बढ़ सकते हैं। चावल, आटा, तेल, चीनी और पैक्ड सामान भी महंगे होने की आशंका बढ़ सकती है।
दूध और रसोई का बजट भी प्रभावित
दूध और डेयरी उत्पादों की सप्लाई भी ईंधन पर निर्भर रहती है। गांवों से दूध लाने वाली गाड़ियां, कोल्ड स्टोरेज और वितरण व्यवस्था में लगातार ईंधन का इस्तेमाल होता है। ऐसे में आने वाले दिनों में दूध, दही, मक्खन, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतों में भी असर देखने को मिल सकता है। यानी सुबह की चाय से लेकर रसोई तक खर्च बढ़ने की संभावना बन सकती है।
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ऑटो और रोजमर्रा की सेवाओं पर असर
सीएनजी और पेट्रोल महंगे होने का असर ऑटो, कैब और निजी वाहनों के खर्च पर भी पड़ेगा। इससे लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ सकता है। साथ ही ऑनलाइन डिलीवरी सेवाएं, पैकेज्ड सामान और दैनिक उपयोग की चीजें बनाने वाली कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। कई कंपनियां कीमत बढ़ाने या सामान की मात्रा कम करने का रास्ता भी चुन सकती हैं।
किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ी
खेती-किसानी में भी डीजल का बड़ा इस्तेमाल होता है। ट्रैक्टर, सिंचाई और फसल ढुलाई पर बढ़ी लागत किसानों का खर्च बढ़ा सकती है। इसका असर बाद में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी दिख सकता है। यानी ईंधन के बढ़ते दाम सिर्फ गाड़ी की टंकी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि धीरे-धीरे हर घर के मासिक बजट को प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले दिनों में महंगाई की यह लहर और बड़ी चुनौती बन सकती है।