मध्यप्रदेश के महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में 24-25 नवंबर को भविष्य की युद्ध रणनीति पर बड़ा सैन्य सेमिनार होने जा रहा है। इसमें देश के शीर्ष सैन्य कमांडर, रणनीतिक विशेषज्ञ, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट, इंडस्ट्री प्रतिनिधि और वेटरन्स शामिल होकर वर्ष 2035 के युद्ध मॉडल को आकार देंगे। बदलते जियो-पॉलिटिकल समीकरण, नई तकनीक, ड्रोन खतरे और मल्टी-डोमेन बैटलफील्ड को ध्यान में रखते हुए सेना की भविष्य की दिशा तय की जाएगी।
भविष्य के युद्धक्षेत्र पर होगा गहन मंथन
सेमिनार का मुख्य उद्देश्य भविष्य के युद्ध को समझकर भारतीय सेना की तैयारी को मजबूत दिशा देना है। विशेषज्ञ 2035 तक बदलने वाले सुरक्षा माहौल, नए युद्ध स्वरूप, ग्रे-जोन ऑपरेशन और मल्टी-डोमेन चुनौतियों का आकलन करेंगे। इसके आधार पर आधुनिक युद्ध रणनीति को अपडेट करने की रूपरेखा बनेगी।
हाई-टेक तकनीकों पर सेना की तैयारी की समीक्षा
चर्चा का खास फोकस AI आधारित निर्णय प्रणाली, रोबोटिक्स, अनमैन्ड सिस्टम, काउंटर-ड्रोन क्षमता, क्वांटम टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऑपरेशन्स पर होगा। सेना इन क्षेत्रों में कितनी तैयार है और किन क्षमताओं की जरूरत पड़ेगी, इसका विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा।
डिफेंस इकोसिस्टम की भूमिका पर जोर
लंबी अवधि की सैन्य स्वावलंबन रणनीति के तहत विशेषज्ञ देश के डिफेंस इकोसिस्टम—स्टार्ट-अप, निजी उद्योग, तकनीकी संस्थान और शोध इकाइयों—की ताकत एवं कमियों का अध्ययन करेंगे। आत्मनिर्भरता को अगले स्तर तक ले जाने के उपाय भी सुझाए जाएंगे।
सेना की संरचना और नेतृत्व सुधार पर चर्चा
फ्यूचर वॉरफेयर को देखते हुए सेना की संगठनात्मक संरचना, कमांड सिस्टम और नेतृत्व मॉडल में जरूरी सुधारों पर भी मंथन होगा। मल्टी-डोमेन बैटलफील्ड में तेजी से निर्णय लेने वाली सेना तैयार करने की दिशा पर जोर रहेगा।
तीन प्रमुख थीम पर बनेगी भविष्य की दिशा
सेमिनार तीन बड़ी थीम — फ्यूचर बैटलफील्ड 2035, टेक्नोलॉजी रेडीनेस, और भविष्य की दिशा की रूपरेखा — पर केंद्रित रहेगा। साइबर, स्पेस, इंफॉर्मेशन और कॉग्निटिव वॉरफेयर को भविष्य का निर्णायक क्षेत्र माना जा रहा है, जिनके प्रभाव और नियंत्रण पर विशेषज्ञ गहराई से चर्चा करेंगे।