टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर इस समय आलोचनाओं के सबसे बड़े केंद्र में हैं। पिछले साल जुलाई में कोच बनने के बाद उन्होंने टीम को चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप जिताकर उम्मीदें बढ़ाई थीं, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन लगातार गिरता गया। साउथ अफ्रीका के खिलाफ 2-0 की क्लीन स्वीप हार ने माहौल और गर्म कर दिया है। इससे पहले न्यूजीलैंड ने भारत को घरेलू मैदान पर 3-0 से हराया था। भारत के 90 साल के टेस्ट इतिहास में ऐसा सिर्फ तीन बार हुआ है, और इनमें से दो क्लीन स्वीप गंभीर के कार्यकाल में आए। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या गंभीर टेस्ट क्रिकेट में टीम को संभालने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
रवि शास्त्री ने दिया चौंकाने वाला बचाव
लेकिन इसी बहस के बीच पूर्व भारतीय कोच रवि शास्त्री ने गंभीर को घेरना गलत बताया है। प्रभात ख़बर के पॉडकास्ट में शास्त्री ने साफ कहा कि हार की जिम्मेदारी सिर्फ कोच की नहीं होती। उन्होंने कहा कि मैदान में खेलने वाले 11 खिलाड़ी और पूरा सपोर्ट स्टाफ भी उतना ही जिम्मेदार है। शास्त्री बोले कि मेरे समय में भी कई बार ऐसा हुआ कि हार के बाद सिर्फ कोच को निशाना बनाया गया, जबकि खिलाड़ियों को भी उतनी ही चोट महसूस होनी चाहिए। जब हार का दर्द खिलाड़ियों में नहीं होगा, तब सुधार की उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए।
ये भी पढ़ें : कटक में Surya की बड़ी चाल, पहले T20 में कौन बनेगा भारत का असली ब्रह्मास्त्र, सबकुछ हो गया सेट !
गंभीर की रणनीति कमजोर या टीम का कॉम्बिनेशन ढहा?
शास्त्री ने आगे कहा कि भारत की हालिया टेस्ट हार एक सामूहिक नाकामी है। साउथ अफ्रीका ने एक टीम की तरह खेला, जबकि भारत कहीं भी तालमेल नहीं बैठा पाया। बल्लेबाजी का खराब फॉर्म, गेंदबाजी में असर की कमी और गलत टीम कॉम्बिनेशन इन सब ने मिलकर टीम को दबाव में ला दिया। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति पर ठीकरा फोड़ना आसान है, लेकिन वास्तविकता यह है कि मैदान पर फैसले खिलाड़ियों की भी जिम्मेदारी होती है। गंभीर की रणनीति पर सवाल भले उठ रहे हों, पर असल समस्या टीम के सामूहिक प्रदर्शन में छिपी है।
टीम इंडिया के लिए चेतावनी का समय
शास्त्री के बयान के बाद यह बहस और तेज हो गई है कि क्या गंभीर को अनावश्यक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि भारत का घरेलू टेस्ट दबदबा अब डगमगा रहा है। 1999-2000 में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को पहली बार घरेलू मैदान पर क्लीन स्वीप किया था। लेकिन बीते एक साल में न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका ने दोबारा ये काम दोहराया। यह संकेत है कि टीम इंडिया को रणनीति, चयन और कॉम्बिनेशन के स्तर पर बड़े बदलाव की जरूरत है। सवाल यह नहीं कि दोषी कौन है, बल्कि यह कि टीम इंडिया टेस्ट क्रिकेट में अपनी बादशाहत कैसे वापस हासिल करेगी।