Ganesh Chaturthi 2026: मुंबई में गणेशोत्सव की रौनक देखते ही बन रही है। 14 सितंबर से शुरू हो रहे गणपति उत्सव को लेकर शहर के अलग-अलग हिस्सों में भव्य सजावट और तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। गणेश चतुर्थी से पहले ही कई प्रमुख पंडालों में बप्पा के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी है। इनमें मुंबई के किंग्स सर्किल स्थित GSB सेवा मंडल का गणपति पंडाल खास आकर्षण बना हुआ है। GSB सेवा मंडल के महागणपति को देश के सबसे समृद्ध गणपति पंडालों में गिना जाता है। इस बार बप्पा की प्रतिमा को 66 किलो से अधिक सोने, करीब 335 किलो चांदी और बेशकीमती रत्नों से सजाया गया है। भगवान गणेश का यह भव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
703 करोड़ रुपये से ज्यादा का इंश्योरेंस
GSB महागणपति की सुरक्षा को लेकर भी इस बार खास इंतजाम किए गए हैं। पूरे पंडाल को करीब 703 करोड़ 27 लाख रुपये का बीमा कवर दिया गया है। इसमें गणपति की प्रतिमा पर चढ़ाए गए आभूषणों और कीमती सामान के साथ आयोजन से जुड़ी अन्य सुरक्षा को भी ध्यान में रखा गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को भी व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया गया है।
प्रथम मुखदर्शन में उमड़ी भक्तों की भीड़
गणेशोत्सव शुरू होने से पहले रविवार को GSB सेवा मंडल के महागणपति का प्रथम मुखदर्शन कराया गया। बप्पा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सोने-चांदी के आभूषणों और रत्नों से सजे गणपति के भव्य स्वरूप को देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध नजर आए। GSB महागणपति के दर्शन के लिए हर साल मुंबई के अलावा दूसरे शहरों से भी लोग पहुंचते हैं। इस बार भी उत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।
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भव्यता के साथ सेवा की भी परंपरा
GSB सेवा मंडल की खास पहचान केवल महागणपति की भव्य सजावट नहीं है। यहां पूजा-पाठ के साथ वैदिक परंपराओं और सामाजिक सेवा को भी विशेष महत्व दिया जाता है। गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए अन्नदान और भोजन की व्यवस्था की जाती है। मंडल से जुड़े अमित पाई ने बताया कि आयोजन के दौरान खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की ओर से तय नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा। मंडल की कोशिश रहती है कि दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो और जरूरतमंद लोगों तक भी भोजन पहुंचाया जा सके। इसी वजह से GSB महागणपति सिर्फ अपनी बेशकीमती सजावट और विशाल बीमा कवर के लिए ही नहीं, बल्कि पूजा, परंपरा और सेवा के लिए भी देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है।