Why Tulsi is not offered to Ganesha: गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। भक्त बप्पा को मोदक, लड्डू, लाल फूल और दूर्वा अर्पित करते हैं। गणपति की पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व बताया गया है। वहीं एक बात ऐसी भी है, जिसे लेकर कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि भगवान गणेश को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसके पीछे एक पौराणिक प्रसंग बताया जाता है। जानें तुलसी और गणपति से जुड़ी पौराणिक कथा और इसकी धार्मिक मान्यता।
2026 में इस दिन होगी गणेश चतुर्थी
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के मुताबिक, इस बार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे से शुरू होगी और अगले दिन 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी। भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में माना जाता है। इसी वजह से 14 सितंबर को ही गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा और इसी दिन घरों में गणपति की स्थापना भी की जाएगी।
तुलसी और गणेश जी से जुड़ी क्या है कहानी?
धार्मिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश नदी के किनारे ध्यान कर रहे थे। उसी समय वहां से तुलसी देवी का गुजरना हुआ। गणेश जी के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर तुलसी ने उनसे विवाह करने की इच्छा जाहिर की। हालांकि, गणेश जी ने स्वयं को ब्रह्मचारी बताते हुए विवाह का प्रस्ताव स्वीकार करने से मना कर दिया। इस बात से तुलसी नाराज हो गईं और उन्होंने गणेश जी को श्राप दे दिया कि आगे चलकर उनका विवाह होगा।
गणेश जी ने भी तुलसी को दिया श्राप
कथा के मुताबिक, तुलसी के श्राप से गणेश जी भी अप्रसन्न हुए। उन्होंने तुलसी को श्राप दिया कि उनका विवाह एक असुर से होगा। बाद में तुलसी को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने गणेश जी से क्षमा मांगी। इसके बाद गणेश जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि तुलसी भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को प्रिय होंगी और उनका धार्मिक महत्व बहुत बढ़ जाएगा।
यह भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi 2026 Date: कल या परसों, कब है गणेश चतुर्थी? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, आरती और मंत्र
इसलिए गणपति पूजा में नहीं चढ़ती तुलसी
मान्यता है कि इसी प्रसंग के कारण भगवान गणेश की पूजा में तुलसी अर्पित नहीं की जाती। इसके बदले गणपति को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता में दूर्वा को गणेश जी को प्रिय माना गया है और पूजा में इसका विशेष स्थान बताया गया है। इसलिए गणेश चतुर्थी पर बप्पा को मोदक और फूलों के साथ दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है, जबकि तुलसी दल चढ़ाने से परहेज किया जाता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।