Ganesh Idol For Home : गणेश चतुर्थी के मौके पर लोग घर में गणेश जी की मूर्ति लाकर पूजा करते हैं। कई घरों में गणपति की मूर्ति पूरे साल भी रखी जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि घर में गणेश जी की हर तरह की मूर्ति रखना सही नहीं माना जाता? धार्मिक मान्यताओं और वास्तु के अनुसार मूर्ति का आकार, मुद्रा और दिशा भी खास मानी जाती है। अगर आप भी घर के लिए गणेश जी की मूर्ति खरीदने जा रहे हैं, तो कुछ आसान बातों का ध्यान रख सकते हैं।
सूंड किस तरफ होनी चाहिए?
घर में गणेश जी की मूर्ति लेते समय उनकी सूंड की दिशा पर खास ध्यान दिया जाता है। आम तौर पर घर की पूजा के लिए गणेश जी की सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई मूर्ति को शुभ माना जाता है। ऐसी मूर्ति को पूजा के लिए आसान माना जाता है और कई लोग इसे घर में सुख-शांति से जोड़कर देखते हैं। वहीं दाईं ओर सूंड वाली मूर्ति की पूजा के लिए कुछ खास नियम बताए जाते हैं, इसलिए इसे घर में रखने से पहले सही जानकारी लेना बेहतर रहता है।
गणेश जी की बैठी हुई मूर्ति रखें
घर के लिए गणेश जी की बैठी हुई मूर्ति को अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि ऐसी मूर्ति घर में स्थिरता और शांति का संकेत देती है। गणेश जी का चेहरा शांत और प्रसन्न होना भी अच्छा माना जाता है। पूजा के लिए बहुत बड़ी या बेहद भारी मूर्ति लेने की जरूरत नहीं है। घर के मंदिर के हिसाब से छोटी और साफ-सुथरी मूर्ति भी रखी जा सकती है।
मूर्ति में दिखें ये चीजें
गणेश जी की मूर्ति लेते समय देखें कि उनका एक दांत टूटा हुआ हो, हाथों में सामान्य रूप से उनके प्रिय माने जाने वाले सामान हों और चेहरा प्रसन्न नजर आए। कई लोग गणेश जी के साथ मूषक और मोदक वाली मूर्ति को भी पसंद करते हैं। हालांकि मूर्ति चुनते समय सबसे जरूरी बात आपकी श्रद्धा और पूजा का तरीका है।
गणेश जी की मूर्ति कहां रखें?
मूर्ति को घर के मंदिर या किसी साफ जगह पर रखना बेहतर माना जाता है। वास्तु मान्यताओं में उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को पूजा के लिए अच्छा माना जाता है। अगर वहां जगह नहीं है तो घर में उपलब्ध साफ और शांत जगह पर गणेश जी की स्थापना की जा सकती है। मूर्ति को सीधे जमीन पर रखने के बजाय साफ चौकी या आसन पर रखना अच्छा माना जाता है।
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इन बातों का भी रखें ध्यान
गणेश जी की मूर्ति के आसपास हमेशा साफ-सफाई रखें। मूर्ति के सामने बेकार सामान, जूते-चप्पल या गंदगी नहीं होनी चाहिए। अगर गणेश चतुर्थी पर कुछ दिनों के लिए मूर्ति स्थापित कर रहे हैं, तो पूजा और विसर्जन की स्थानीय परंपरा का पालन करें। सबसे जरूरी बात यह है कि मूर्ति रखने के साथ नियमित रूप से साफ-सफाई और श्रद्धा से पूजा की जाए। धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग जगहों पर थोड़ी अलग हो सकती हैं, इसलिए इन्हें आस्था से जुड़ी मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए।