मध्यप्रदेश में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला है। झाबुआ जिले में स्थित प्रसिद्ध गणेश मंदिर में 40 किलो चांदी से तैयार आभा मंडल भक्तों के सहयोग से स्थापित किया गया है। मंदिर की इस नई पहचान ने श्रद्धालुओं की भक्ति को और गहरा किया है। यहां भगवान गणेश की प्रतिमा 1996 में मिट्टी से स्थापित की गई थी, जो बाद में भव्य मंदिर निर्माण की आधारशिला बनी। अब मंदिर जन-जन की आस्था का बड़ा केंद्र बन गया है।
1996 में मिट्टी से हुई थी शुरुआत
मंदिर परिसर में वर्ष 1996 में मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। सात साल तक भगवान गणपति टीन शेड में विराजमान रहे। इसके बाद भक्तों ने मंदिर निर्माण का निर्णय लिया। लकी ड्रॉ से जुटाई गई राशि से 2005 में मंदिर का भव्य निर्माण हुआ और अक्षय तृतीया के दिन गणपति के साथ माता रिद्धि-सिद्धि की स्थापना की गई।
भक्तों के सहयोग से जुटी चांदी
भक्तों ने मिलकर भगवान के आभा मंडल को पूरी तरह चांदी से बनाने का संकल्प लिया। लगभग 40 किलो चांदी जुटाने के बाद यह कार्य पूरा हुआ। इसमें साढ़े चार लाख रुपए की लकड़ी और करीब 4 लाख रुपए मजदूरी का खर्च आया। भक्तों की एकजुटता ने इस कार्य को संभव बनाया और मंदिर को नई पहचान दी।
भव्य आभा मंडल बना आकर्षण
तैयार हुआ आभा मंडल न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र भी है। गणेश उत्सव के अवसर पर यहां हजारों की संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। आम दिनों में भी यह मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
जल्द होगी शुभ-लाभ की स्थापना
मंदिर प्रबंधन ने बताया कि आभा मंडल बनने के बाद अब भगवान गणेश के पुत्र शुभ-लाभ की प्रतिमा की स्थापना की योजना बनाई गई है। इसके लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। माना जा रहा है कि इससे मंदिर की भव्यता और आध्यात्मिक महत्ता और अधिक बढ़ जाएगी।