
Ganesh Chaturthi 2025: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन भगवन श्री गणेश का प्राकट्य हुआ था। इस दिन से भगवान गणपति घर-घर विराजेंगे। महाराष्ट्र की तर्ज पर ही 11 दिन तक उत्सव होगा। आइए जानते हैं गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है।
कब करें गणपति की प्रतिष्ठापना
ज्योतिषाचार्यों विभोर इंदुसुत के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 44 मिंट पर आरम्भ हो जाएगी और 27 अगस्त को दोपहर 3:44 तक रहेगी। सूर्योदयकालीन चतुर्थी 27 अगस्त को ही होगी। इस दिन ही गणपति की प्रतिष्ठापना करनी चाहिए।
बुधवार होने से कई शुभ संयोग
ज्योतिषाचार्य राहुल अग्रवाल के अनुसार बुधवार श्रीगणेश का ही दिन माना जाता है। 27 अगस्त को भी बुधवार है । इस दिन रहने वाली कन्या राशि जिसका स्वामी भी बुध होता है तथा चित्रा नक्षत्र के संयोग ने जो कि पूरे दिनरहेगा । इस दिन तीन शुभ राजयोग का संयोग भी बन रहा है- प्रीति योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग के साथ ही कर्क राशि में बुध और शुक्र के होने से लक्ष्मी नारायण योग भी बन रहा है। इससे श्री गणेश चतुर्थी भी अधिक प्रभावशाली और शुभ बन गई है।
11 दिन चलेगा श्रीगणेश महोत्सव
अपनी-अपनी मान्यताओं के अनुसार श्रीगणेश जी की घरों में स्थापना 3 5,7 9 और 11 दिन की होती है। पहले महाराष्ट्र में ही श्री गणेश जी की प्रतिष्ठापना होती थी। लेकिन अब यह हर जगह श्रद्धा और भावभक्ति में होने लगी है।
कहां और किस दिशा में करें गणपति विराजित
ज्योतिषाचार्य विभोर इंदुसुत के अनुसार वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान कोण गणेश जी की स्थापना के लिए श्रेष्ठ है। इसके अलावा पूर्व और उत्तर दिशा में भी स्थापित कर सकते हैं ।
क्या करें
गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी पर्यन्त प्रतिदिन ॐ गं गणपते नमः का रोज एक माला जाप करें। और गणेश जी को दूर्वा और मोतीचूर के लड्डू अर्पित करें और प्रातः संध्या गणेश जी की आरती अवश्य करें।
गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त
27 अगस्त 2025
प्रातः 5:56 से प्रातः 9:08 तक (लाभ व अमृत)
सुबह 7:32 से 9:00 बजे तक ( अमृत चौघड़िया)
सुबह 10:44 से 12:00 बजे तक ( शुभ चौघड़िया)
दोपहर 1:30 से 3:44 के बीच
श्री गणेश विसर्जन – 6 सितम्बर - अनंत चतुर्दशी
इस वक्त न करें श्रीगणेश स्थापना
27 अगस्त 2025 राहु काल- दोपहर 12 बजे से 1.30 बजे तक, ( राहु काल में शुभ कार्य करना निषेध है)
गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन
गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन मुख्य रूप से तो अनंत चतुर्दशी को ही किया जाता है। मुख्य विसर्जन 6 सितम्बर अनंत चतुर्दशी को ही किया जाना श्रेष्ठ है।
विसर्जन न करना चाहें तो क्या करें
बहुत से लोगों की मान्यता है कि श्रीगणेश प्रतिमा का विसर्जन नहीं करना चाहिए। ऐसे जातक दिवाली पर पूजित श्रीगणेश जी की मूर्ति या सुपारी का पूजन कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में पूजा 11 दिन की होगी। इनका विसर्जन नहीं होगा।