गंगा एक्सप्रेसवे ने पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन आसान करने के साथ माल ढुलाई और टूर-ट्रैवल कारोबार के लिए भी नए अवसर खोले हैं। मेरठ से प्रयागराज तक करीब 594 किलोमीटर लंबे इस छह लेन के मार्ग से परिवहन कारोबारियों के मुताबिक यात्रा का समय घटा है और ईंधन व वाहनों के रखरखाव पर होने वाला खर्च कम हुआ है।
माल पहुंचाने में लग रहा कम समय
करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे से ट्रांसपोर्टरों को समयबद्ध डिलीवरी में मदद मिल रही है। सहारनपुर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी अमित शर्मा के मुताबिक, पहले सहारनपुर से प्रयागराज तक माल पहुंचाने में 20 से 22 घंटे लगते थे, जबकि अब इसमें 11 से 12 घंटे लग रहे हैं। उनके अनुसार, टोल खर्च के बावजूद ईंधन और रखरखाव में बचत से परिचालन लागत घट रही है।
मेरठ के ट्रांसपोर्ट कारोबारी शिव कुमार यादव का कहना है कि समय पर माल पहुंचने से व्यापारियों का भरोसा बढ़ा है। कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामान और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की आपूर्ति के लिए भी रास्ता सुगम हुआ है।
पर्यटन कारोबार को भी फायदा
टूर-ट्रैवल संचालकों के अनुसार, मेरठ से प्रयागराज की सड़क यात्रा अब करीब छह घंटे में पूरी हो सकती है। पहले इसमें 10 से 12 घंटे लगते थे। इससे धार्मिक यात्राओं, पारिवारिक भ्रमण और समूह पर्यटन के लिए टैक्सी तथा बस सेवाओं की संभावनाएं बढ़ी हैं।
12 जिलों को जोड़ता आर्थिक गलियारा
एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरता है। इससे कृषि उत्पादों को मंडियों और प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुंचाने में भी सहूलियत मिल सकती है। शाहजहांपुर में 3.5 किलोमीटर लंबी आपातकालीन हवाई पट्टी बनाई गई है।
एक्सप्रेसवे के दोनों ओर करीब 2635 हेक्टेयर में एकीकृत विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर विकसित करने की योजना है। इससे परिवहन, भंडारण और उद्योगों को जोड़ने की तैयारी है। हालांकि, इसका व्यापक आर्थिक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रस्तावित औद्योगिक गतिविधियां कितनी तेजी से धरातल पर उतरती हैं।