Garuda Purana: जीवन का सत्य मृत्यू है, इस सच कोई भी झुटला नहीं सकता है. इसलिए मरने के बाद गरूड पुराण में कुछ रहस्य हैं. जिन्हें जानकर आपके भी रातों की नींद उड़ जाएगी. जी हां गरूड पुराण में साफ लिखा है कि व्यक्ति के मरने के बाद कम से कम 15 दिनों तक घर में उसकी आत्माएं निवास करती हैं. जानकारी के मुताबिक, अगर किसी की मृत्यु सूर्यास्त के बाद होती है तो उसका दाह संस्कार अगले दिन किया जाता है. ऐसे में आपने गौर किया होगा कि मृत्यु के बाद व्यक्ति के शव को अकेला नहीं छोड़ा जाता है.
क्या कहती है गरूड पुराण?
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत शरीर को रात में अकेले ना छोड़ने का सबसे बड़ा कारण यही है कि अगर शव को अकेला छोड़ दिया जाए तो, उसे कुत्ते-बिल्ली जैसे जानवर (Dead body) नोच खाएंगे. रात में शव को अकेला छोड़ दिया जाए तो आसपास भटक रही बुरी शक्तियां उसमें प्रवेश कर सकती हैं. ऐसे में घर पर नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव पड़ सकता है. पूरे परिवार के लिए मुसीबत की वजह बन सकती हैं.
आने लगती है बदबू
ये भी माना जाता है कि शव को अकेला छोड़ने पर उसमें से बदबू आने लगती है. साथ ही शव को ज्यादा देर तक घर में रखने से बैक्टीरिया फैलने के आसार भी बढ़ जाते हैं. ऐसे में ये बेहद जरूरी है कि शव के पास कोई न कोई व्यक्ति बैठा रहे और धूप या अगरबत्ती शव के चारों तरफ लगातार जलती रहे ताकि शव से आने वाली दुर्गन्ध चारों ओर ना फैले. रात में तांत्रिक क्रियाओं का प्रभाव तेज हो जाता है. ऐसे में शव को अकेला छोड़ने से उसका इस्तेमाल तंत्र साधना के लिए किया जा सकता है. आत्मा को नुकसान पहुंच सकता है.