मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित भेड़ाघाट में बना चौसठ योगिनी मंदिर न केवल तांत्रिक साधना का केंद्र है, बल्कि दाम्पत्य जीवन को मजबूत करने वाले दुर्लभ आध्यात्मिक स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है। यहां स्थित गौरीशंकर मंदिर में विराजमान शिव-पार्वती की विवाह उपरांत की प्रतिमा विश्व में अपनी तरह की अकेली है। माना जाता है कि इस मंदिर में दर्शन और विशेष पूजन करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, सामंजस्य और सुख की प्राप्ति होती है। सावन में यहां नवदम्पतियों की भीड़ उमड़ती है।
शिव विवाह की दुर्लभ मूर्ति
भेड़ाघाट स्थित चौसठ योगिनी मंदिर परिसर के मध्य गौरीशंकर मंदिर है, जहां शिव-पार्वती की विवाहोत्तर दुर्लभ प्रतिमा विराजमान है। इतिहासकारों के अनुसार यह प्रतिमा लगभग 1500 साल पुरानी है और इसे 1155 ई. में चेदि वंश की महारानी अल्हाणा देवी ने बनवाया था। प्रतिमा में भगवान शिव माता पार्वती की ओर मुड़कर मुस्कान के साथ देख रहे हैं, जैसे दोनों एक-दूसरे से संवाद कर रहे हों।
तंत्र साधना का प्राचीन केंद्र
इस मंदिर को प्राचीन समय में गोलकी मठ के नाम से जाना जाता था और यह तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध रहा है। चारों ओर 64 योगिनियों की प्रतिमाएं इसे एक विशेष तांत्रिक शक्ति स्थल बनाती हैं। लेकिन अब यहां श्रद्धा का नया स्वरूप देखने को मिलता है — दाम्पत्य सुख के लिए यहां विशेष पूजन कर नवदम्पति आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
नवविवाहितों के लिए आस्था का केन्द्र
मंदिर के पुजारी धर्मेन्द्र पुरी के अनुसार शिव-पार्वती की यह मूर्ति विवाह के बाद के दृश्यों को दर्शाती है, जो आपसी सम्मान और प्रेम का आदर्श प्रस्तुत करती है। यहां वर्ष भर नवविवाहित जोड़े और पारिवारिक मतभेदों से जूझ रहे युगल पूजन के लिए पहुंचते हैं, विशेषकर सावन के महीने में यहां भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।