गौतमबुद्ध नगर। एनडीए का गढ़ कहे जाने वाले गौतमबुद्ध नगर में अभी से 2027 की सीट-शेयरिंग की लड़ाई शुरू हो गई है। जेवर विधानसभा को लेकर बीजेपी और रालोद के बीच खामोश खींचतान शुरू हो चुकी है। जयंत चौधरी का दनकौर में ऑडिटोरियम शिलान्यास और उसके बाद जेवर क्षेत्र में लगातार दौरा साफ संकेत है कि रालोद इस सीट को किसी भी कीमत पर छोड़ने के मूड में नहीं है। इसकी वजह यह है कि 2022 के चुनाव में सपा गठबंधन के साथ रालोद ने जेवर से चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रही। जबकि बीजेपी का दावा सबसे मजबूत है।
जेवर बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीट है। धीरेंद्र सिंह ने 2017 में 22 हजार और 2022 में 56 हजार से ज्यादा वोटों से जीतकर इसे पार्टी का अभेद्य किला बना दिया है। एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में धीरेंद्र सिंह की मेहनत, मुआवजा 1800 से 4300 तक पहुंचाना और लगातार दो जीत, लड़कियों और लड़कों के राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय महाविद्यालय बनवाया – ये सारे तर्क बीजेपी के पास हैं। पार्टी सूत्र बता रहे हैं कि उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से जेवर जैसी मजबूत सीट पर बीजेपी किसी हाल में समझौता करने को तैयार नहीं है।लेकिन जयंत चौधरी ने अपना दांव चल दिया है।
2024 लोकसभा चुनाव में रालोद ने एनडीए के साथ मिलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन किया था। अब जयंत को लगता है कि गठबंधन का हक बनता है कि उन्हें कम से कम एक मजबूत सीट मिले। और जेवर उनके लिए सिर्फ सीट नहीं, सियासी प्रतिष्ठा का सवाल है। यही इलाका चौधरी चरण सिंह और चौधरी अजित सिंह का गढ़ रहा है।
जाट वोटबैंक (लगभग 1.10-1.20 लाख) आज भी चौधरी परिवार को अपना मानता है।
2022 में सपा गठबंधन में रालोद के अवतार सिंह भड़ाना दूसरे नंबर पर थे – मतलब आधार अभी भी जिंदा है।
जयंत के करीबी नेता खुलकर कह रहे हैं, “एनडीए में हमारा योगदान है। अगर गठबंधन मजबूत रखना है तो उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से जेवर जैसी सीट पर हमें सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहिए।” जयंत का दनकौर दौरा और गांव-गांव में कार्यकर्ता सम्मेलन इसी संकेत का हिस्सा है – रालोद कार्यकर्ताओं को मैसेज साफ है कि 2027 में जेवर पर लड़ाई होगी।
बीजेपी खेमे में हल्की बेचैनी है। धीरेंद्र सिंह भले ही चुप हैं, लेकिन उनके समर्थक कह रहे हैं, “जिस सीट पर हमने खून-पसीना बहाया, जिसे हमने किसान विरोध के बावजूद बचाया, उसे कैसे छोड़ दें?” पार्टी के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “2027 में यूपी की 403 सीटों में से रालोद को 5-7 सीटें ही मिलेंगी। जेवर पर हम पीछे नहीं हटेंगे।”
सियासी गलियारों में चर्चा है कि अगर बीजेपी जेवर नहीं छोड़ती तो रालोद पश्चिमी यूपी की 2-3 और सीटों पर अड़ सकता है। अगर जयंत बाहर हो गए तो जेवर ही उनकी सबसे बड़ी लड़ाई की जगह बन सकती है।
एनडीए के अंदर की यह पहली बड़ी खींचतान है। जयंत चौधरी ने जेवर को चुनकर साफ कर दिया है कि गठबंधन में रहते हुए भी वे अपनी सियासी जमीन बचाने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे। बीजेपी के लिए चुनौती यह है कि धीरेंद्र सिंह को बचाना है और गठबंधन भी। 2027 अभी दूर है, लेकिन जेवर विधानसभा पर गठबंधन के अंदर की लड़ाई अभी से शुरू हो चुकी है।