भारत की इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला हेडिंग्ले में भारत की हार के साथ शुरू हुआ और सोशल मीडिया पर मुख्य कोच गौतम गंभीर को लेकर आलोचनाओं की बाढ़ आ गई, उन पर टीम चयन बिगाड़ने का आरोप लगाया गया. लेकिन बर्मिंघम में दूसरे टेस्ट में शुभमन गिल की कप्तानी में टीम ने 336 रन की जबरदस्त जीत दर्ज की, जिससे भारत ने पहली बार 58 साल बाद एडबस्टन की जीत सुनिश्चित की और अब लोग जीत में गंभीर की भूमिका को नजरअंदाज कर रहे हैं. वहीं इस पर कोलकाता नाइटराइडर्स के पूर्व खिलाड़ी मनविंदर बिस्ला ने इस सोशल मीडिया रुझान की निंदा की. जहां पहले गंभीर को हार का जिम्मेदार बताया गया, लेकिन जीत के बाद इसे शुभमन गिल युग की शुरुआत मानी जा रही है. बिस्ला ने ट्वीट किया, “पहले गंभीर ने प्लेइंग XI बिगाड़ दी, अब शुभमन युग शुरू”, जिसके बाद उन्होंने आलोचकों को जमकर लताड़ा.
पहले टेस्ट में हार तो दूसरे में बड़ी जीत
भारत ने इंग्लैंड दौरे के पहले टेस्ट में हेडिंग्ले में 5 विकेट से हार का सामना किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर मुख्य कोच गौतम गंभीर को टीम चयन में कथित गड़बड़ी के लिए नाराज़गी झेलनी पड़ी. लेकिन 2 जुलाई को बर्मिंघम (एडबस्टन) में खेले गए दूसरे टेस्ट में शुभमन गिल की कप्तानी और गंभीर की रणनीतियों ने रंग दिखाया. भारत ने इंग्लैंड को 336 रन से हराया, जो 58 साल में पहली ऐतिहासिक जीत थी.
बिस्ला की तीखी टिप्पणी
पूर्व केकेआर विकेटकीपर–बल्लेबाज मनविंदर बिस्ला ने सोशल मीडिया पर उन आलोचकों की आलोचना की, जो पहले टेस्ट में हार के लिए गंभीर को दोषी ठहराते हैं लेकिन दूसरी टेस्ट में जीत में उन्हें बिना श्रेय दिये नजरअंदाज कर रहे हैं. उन्होंने लिखा कि पहले टेस्ट में लोगों ने गौतम गंभीर पर आरोप लगाया कि उन्होंने टीम चयन खराब किया. दूसरे टेस्ट में जीत के बाद आलोचना कम हो गई और लोग कहने लगे कि अब शुभमन गिल का युग शुरू हो गया. दरअसल बिस्ला कहना चाहते थे कि जीत-हार दोनों को ध्यान से देखा जाना चाहिए और पूरी टीम को श्रेय मिले. स्पष्ट है कि बिस्ला चाहते हैं कि हम जीत में गंभीर की भूमिका को भी सराहें, न कि केवल हार में उन्हें कोसें.
गौतम गंभीर की आलोचना क्यों?
हेडिंग्ले हार के बाद गंभीर ने स्पष्ट किया था कि टेस्ट क्रिकेट में जीत के लिए “20 विकेट लेना” ज़रूरी है. इसके बावजूद, बर्मिंघम में टीम ने शुरुआती मैच की तुलना में अलग रणनीति अपनाई. टीम में दो ऑल‑राउंडर रखे गए और बल्लेबाज़ों को संतुलन के रूप में प्राथमिकता मिली. कुछ पूर्व खिलाड़ी और विशेषज्ञ ने इसे ‘डिफेंसिव’ चयन कहा, लेकिन आखिर में आउटपुट शानदार रहा.
पूर्व खिलाड़ी योगराज सिंह ने कहा कि गौतम गंभीर पर की गई आलोचना अनुचित थी और बर्मिंघम जीत ने यह साबित कर दिया कि उन्हें और पूरी टीम को समर्थन दिया जाना चाहिए.