Gautam Gambhir Decision : भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर एक बार फिर अपने फैसले को लेकर चर्चा में हैं। कोलंबो टेस्ट से पहले जब कुलदीप यादव को प्लेइंग इलेवन से बाहर कर डेब्यूटेंट सारांश जैन को मौका दिया गया तो कई क्रिकेट फैंस और विशेषज्ञों ने इस फैसले पर सवाल उठाए। लेकिन मैच आगे बढ़ने के साथ ही गंभीर का यह फैसला सही साबित होता नजर आया।
सारांश जैन ने डेब्यू में छोड़ी छाप
कोलंबो टेस्ट की पहली पारी में सारांश जैन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2 अहम विकेट हासिल किए। सबसे बड़ा विकेट सोनल दिनुषा का रहा, जो पूरी सीरीज में भारतीय गेंदबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए थे। चौथे दिन नई गेंद से दिनुषा को आउट कर सारांश ने श्रीलंका को फॉलोऑन बचाने का मौका भी नहीं दिया। उनके प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया कि टीम प्रबंधन ने उन्हें यूं ही मौका नहीं दिया था।
गॉल टेस्ट में फीके रहे थे कुलदीप
सीरीज के पहले टेस्ट में कुलदीप यादव से काफी उम्मीदें थीं, क्योंकि गॉल की पिच स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। हालांकि कुलदीप उस मुकाबले में सिर्फ एक विकेट ही हासिल कर सके थे। ऐसे में टीम प्रबंधन ने कोलंबो टेस्ट के लिए बदलाव का फैसला लिया और सारांश जैन पर भरोसा जताया। यह फैसला अब टीम इंडिया के लिए फायदेमंद साबित होता दिख रहा है।
प्रसिद्ध कृष्णा पर भी गंभीर ने जताया भरोसा
सिर्फ सारांश जैन ही नहीं, गौतम गंभीर ने प्रसिद्ध कृष्णा को लगातार मौके देकर भी आलोचनाएं झेली हैं। लेकिन कोलंबो टेस्ट की पहली पारी में प्रसिद्ध कृष्णा ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 16 ओवर में 52 रन देकर 3 विकेट झटके। वह भारत के सबसे सफल गेंदबाजों में शामिल रहे और उन्होंने अपने प्रदर्शन से आलोचकों को जवाब दिया।
हर्षित राणा को लेकर भी हुए थे ट्रोल
व्हाइट बॉल क्रिकेट में भी गौतम गंभीर के कुछ फैसलों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। हर्षित राणा को लगातार मौके देने को लेकर भी सोशल मीडिया पर गंभीर को ट्रोल किया गया। हालांकि हर्षित ने कई मौकों पर बल्ले और गेंद दोनों से टीम इंडिया के लिए उपयोगी योगदान दिया है। निचले क्रम में बल्लेबाजी की उनकी क्षमता टीम को अतिरिक्त मजबूती देती है।
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परिणामों से मिल रहा फैसलों को समर्थन
गौतम गंभीर के कई फैसले शुरुआत में विवादों में रहे, लेकिन मैदान पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने उन फैसलों को मजबूती दी है। कोलंबो टेस्ट में सारांश जैन और प्रसिद्ध कृष्णा का प्रदर्शन इसका ताजा उदाहरण है। यही वजह है कि आलोचनाओं के बावजूद टीम प्रबंधन अपने फैसलों पर भरोसा बनाए हुए है और उसके सकारात्मक नतीजे भी देखने को मिल रहे हैं।