बिहार के गया से सामने आया यह मामला पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अपराध से लड़ने वाली वर्दी ही जब लूट की साजिश रचने लगे, तो भरोसा डगमगाना तय है। चलती ट्रेन में कारोबारी के कर्मचारी से 1.44 करोड़ रुपये का सोना लूटने के मामले में गया जीआरपी के थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। जिन पर अपराध रोकने की जिम्मेदारी थी, वही इस लूट के मास्टरमाइंड निकले। इस खुलासे के बाद रेल पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
ट्रेन में रची गई साजिश
यह घटना 21 नवंबर की है, जब 22307 हावड़ा-बीकानेर एक्सप्रेस से सफर कर रहे कारोबारी के स्टाफ धनंजय शाश्वत के पास से करीब 1 किलो सोना लूट लिया गया। गया जंक्शन पहुंचने से पहले ही जीआरपी के जवानों ने चलती ट्रेन में मारपीट कर सोना छीना और फिर पीड़ित को टिकट कराकर रवाना कर दिया। इतना ही नहीं, पीड़ित को धमकाया गया कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो गंभीर अंजाम भुगतना पड़ेगा। शुरुआत में मामला सामान्य लूट की तरह दिखाया गया, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर परत-दर-परत सच्चाई सामने आने लगी।
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जांच में हुआ बड़ा खुलासा
29 नवंबर को गया रेल थाना में इस मामले की एफआईआर दर्ज की गई। पटना रेल एसपी के नेतृत्व में गठित विशेष जांच टीम ने जब कॉल डिटेल रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों की जांच की, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। जांच में यह साफ हुआ कि इस लूट की साजिश खुद गया रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने अपने अधीनस्थ जवानों के साथ मिलकर रची थी। सबूत मजबूत होने के बाद बुधवार को थानाध्यक्ष को गिरफ्तार कर रेल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन डीएसपी की एसआईटी टीम गठित की गई है।
फरार आरोपियों की तलाश
थानाध्यक्ष की गिरफ्तारी के बाद भी मामला पूरी तरह सुलझा नहीं है। इस लूटकांड में शामिल जीआरपी के चार जवान करन कुमार, अभिषेक चतुर्वेदी, रणंजय कुमार और आनंद मोहन के साथ-साथ परवेज आलम और रेल थाना के पूर्व चालक सीताराम फिलहाल फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा। यह मामला सिर्फ सोना लूट का नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर बैठे अपराधियों को बेनकाब करने का है। अब जनता की नजर इस बात पर है कि आगे कार्रवाई कितनी तेज और सख्त होती है।