Board of Peace: गाजा में जारी संघर्ष को समाप्त करने और स्थायी शांति की दिशा में अंतरराष्ट्रीय प्रयास तेज होते दिख रहे हैं। इसी कड़ी में अमेरिका की ओर से शुरू की गई नई पहल के तहत भारत को भी अहम भूमिका निभाने का निमंत्रण मिला है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना के अंतर्गत गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत को शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है। भारत के इज़रायल और फिलिस्तीन दोनों के साथ संतुलित रिश्तों को देखते हुए इस निमंत्रण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत की भूमिका को मिला अंतरराष्ट्रीय समर्थन
भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया में शांति और संवाद का समर्थक रहा है। गाजा संकट के दौरान भी भारत ने मिस्र के रास्ते मानवीय सहायता पहुंचाई और हिंसा खत्म करने की अपील की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता से जुड़े समझौतों का स्वागत कर चुके हैं। भारत ने बार-बार दोहराया है कि आतंकवाद किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है और समाधान केवल बातचीत से ही संभव है।
पाकिस्तान को भी भेजा गया निमंत्रण
भारत के साथ-साथ पाकिस्तान को भी इस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का निमंत्रण मिलने की जानकारी सामने आई है। पाकिस्तान सरकार ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को औपचारिक रूप से इस पहल का हिस्सा बनने का संदेश मिला है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, उनका देश गाजा में शांति और सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में भागीदारी करेगा।
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बोर्ड ऑफ पीस
बोर्ड ऑफ पीस का गठन डोनाल्ड ट्रंप की 20 सूत्री गाजा शांति योजना के तहत किया गया है। इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा में प्रशासनिक ढांचे के पुनर्निर्माण, स्थिरता और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। ट्रंप खुद इसके अध्यक्ष होंगे, जबकि इसमें कई अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक और राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं।
आगे क्या हो सकता है असर
यदि भारत इस बोर्ड का हिस्सा बनता है, तो गाजा संकट के समाधान में उसकी कूटनीतिक भूमिका और मजबूत हो सकती है। इससे न केवल भारत की वैश्विक छवि को बल मिलेगा, बल्कि पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया को भी नई दिशा मिलने की संभावना है।