मध्य पूर्व में ऐतिहासिक मोड़ की ओर बढ़ती गाजा शांति प्रक्रिया के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने ‘गाजा पीस समिट’ में शामिल होने का औपचारिक न्योता भेजा है। यह सम्मेलन मिस्र के प्रसिद्ध रिसॉर्ट शहर शर्म अल शेख में होने जा रहा है, जहां अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल होंगे। इस दौरान मोदी और ट्रंप की संभावित मुलाकात को लेकर कूटनीतिक गलियारों में हलचल है। फिलहाल पीएमओ की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
गाजा शांति समझौते की दिशा में बड़ा कदम
मिस्र में आयोजित यह गाजा पीस समिट दरअसल उस शांति समझौते का हिस्सा है, जिस पर इजरायल और हमास के बीच वर्षों से विवाद चल रहा था। अब ट्रंप की मध्यस्थता से इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समारोह में 20 देशों के शीर्ष नेता हिस्सा लेंगे, जिनमें अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, सऊदी अरब और भारत भी शामिल हैं।
भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह की भागीदारी तय मानी जा रही है, लेकिन अगर प्रधानमंत्री मोदी खुद शामिल होते हैं तो यह भारत की भूमिका को और मजबूत बना देगा।
भारत की भूमिका क्यों है अहम?
भारत ने हमेशा इजरायल और फिलिस्तीन दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे हैं। संयुक्त राष्ट्र से लेकर द्विपक्षीय मंचों तक भारत ने “संवाद और संयम” की नीति अपनाई है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समझौते में भारत को एक ‘विश्वसनीय मध्यस्थ’ के रूप में देख रहा है।
अगर पीएम मोदी समिट में शामिल होते हैं, तो भारत न केवल शांति प्रक्रिया का हिस्सा बनेगा बल्कि एक ग्लोबल पीस पार्टनर के रूप में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ करेगा।
ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रस्ताव में गाजा संघर्ष को खत्म करने के लिए 20 बिंदुओं की एक विस्तृत योजना रखी है। इसमें युद्धविराम, बंधकों की रिहाई, सेना की वापसी और दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इस योजना के तहत इजरायल को गाजा से कुछ सैन्य बल वापस बुलाने होंगे, जबकि हमास को अपने कब्जे में लिए गए कैदियों को रिहा करना होगा।
हमास और इजरायल की आपत्तियां
हालांकि, इस योजना पर सभी पक्ष सहमत नहीं हैं। हमास ने ट्रंप के प्लान को “बेतुका” बताया है और अपने हथियार न छोड़ने की बात कही है। वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी इस पर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। वह चाहते हैं कि हमास पूरी तरह निष्क्रिय हो जाए तभी समझौते पर अमल हो।
मोदी-ट्रंप मुलाकात की संभावना
अगर पीएम मोदी इस सम्मेलन में जाते हैं, तो उनकी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात की पूरी संभावना है। दोनों नेताओं के बीच पहले भी वैश्विक मंचों पर बेहतरीन संबंध रहे हैं। यह मुलाकात न केवल मध्य पूर्व की राजनीति बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों में भी नई ऊर्जा ला सकती है।