Preparations for Pakistan : पाकिस्तान में प्रांतों के पुनर्गठन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। देश के मौजूदा चार प्रांतों को छोटे प्रशासनिक हिस्सों में बांटकर 12 से 15 तक नए प्रांत बनाने की संभावना पर चर्चा हो रही है। इस प्रस्ताव को सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इसे पाकिस्तान को 15 अलग-अलग देशों में बांटने की योजना समझना सही नहीं होगा। फिलहाल मामला देश की प्रशासनिक और संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव का है, जिस पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति नहीं बन पाई है।
चार प्रांतों की जगह 12 से 15 इकाइयां बनाने की चर्चा
पाकिस्तान में इस समय पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान चार प्रमुख प्रांत हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इन बड़े प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव सामने आया है। इसके पीछे प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने और स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याओं का समाधान करने जैसे तर्क दिए जा रहे हैं। पाकिस्तान के सरकारी हलकों में नए प्रांतों के गठन और जिला स्तर पर प्रशासनिक अधिकार बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि, प्रस्ताव की अंतिम रूपरेखा और नए प्रांतों की निश्चित संख्या को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
आसिम मुनीर की रणनीति पर क्यों उठ रहे सवाल?
इस प्रस्ताव को लेकर सबसे बड़ा सवाल सेना की भूमिका और प्रांतीय स्वायत्तता का है। आलोचकों का तर्क है कि बड़े प्रांतों को छोटे प्रशासनिक हिस्सों में बांटने से केंद्र और सैन्य प्रतिष्ठान का प्रभाव बढ़ सकता है। पाकिस्तान में सेना लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक मामलों में प्रभावशाली भूमिका निभाती रही है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि नए प्रांत बनने से प्रशासनिक ढांचे के साथ सैन्य कमान की व्यवस्था में भी बदलाव हो सकता है। हालांकि, सेना की ताकत बढ़ाने को ही इस प्रस्ताव का आधिकारिक उद्देश्य बताने वाला कोई अंतिम सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
सिंध में सबसे ज्यादा विरोध, बिलावल भुट्टो ने उठाई आवाज
प्रांतों के संभावित बंटवारे का विरोध खास तौर पर सिंध में देखने को मिला है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने प्रांतों के पुनर्गठन के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है। सिंध की राजनीति में इस मुद्दे को क्षेत्रीय पहचान और प्रांतीय अधिकारों से जोड़कर देखा जा रहा है। सिंध विधानसभा में भी प्रांत के विभाजन के विरोध में प्रस्ताव पारित किए जाने की खबरें सामने आई हैं। PPP नेताओं का कहना है कि किसी भी बदलाव से पहले संवैधानिक प्रक्रिया का पालन और संबंधित प्रांत की सहमति जरूरी है। यह विरोध शहबाज शरीफ सरकार के लिए भी राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
संविधान में बदलाव के बिना आसान नहीं होगा फैसला
पाकिस्तान में नए प्रांतों का गठन केवल राजनीतिक घोषणा से संभव नहीं है। इसके लिए संवैधानिक प्रावधानों के तहत प्रक्रिया पूरी करनी होगी। संविधान के अनुच्छेद 239(4) के मुताबिक, किसी प्रांत की सीमाओं में बदलाव करने वाले संवैधानिक संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजने से पहले संबंधित प्रांतीय विधानसभा के कुल सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। ऐसे में प्रस्ताव को लागू करने के लिए राजनीतिक सहमति जुटाना बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल 12 से 15 नए प्रांत बनाने की चर्चा ने पाकिस्तान में केंद्र और प्रांतों के अधिकार, सेना की भूमिका तथा क्षेत्रीय पहचान पर नई बहस छेड़ दी है।