नई पीढ़ी अब केवल किताबों से नहीं, बल्कि अनुभव और संवाद के जरिए भारतीय समाज को समझेगी। मध्य प्रदेश में समाजशास्त्र के सिलेबस को पूरी तरह से नया रूप दिया जा रहा है। इस बदलाव के तहत छात्रों को पारिवारिक रिश्तों की गहराई, भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों का बोध कराया जाएगा। खास बात यह है कि जेन-जेड को यह समझाया जाएगा कि परिवार केवल माता-पिता तक सीमित नहीं है, बल्कि बुआ, फूफा, मौसी, मौसा और मामा-मामी जैसे रिश्तेदार भी उतनी ही अहम भूमिका निभाते हैं। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार किए गए नए पाठ्यक्रम का हिस्सा है।
हर यूनिट में प्रैक्टिकल एक्टिविटी
नए सिलेबस में हर यूनिट को प्रैक्टिकल एक्टिविटी से जोड़ा गया है। विद्यार्थियों को परिवार की संरचना और रिश्तों की अहमियत पर आधारित गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इससे वे केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि अनुभव और संवाद से भी समाज की बारीकियों को समझ पाएंगे। भारतीय समाज में रिश्तों की परिभाषा को विस्तृत रूप में पेश कर यह दिखाया जाएगा कि भावनाएं और जिम्मेदारियां खून के रिश्तों से कहीं आगे होती हैं।
भारतीय ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
पाठ्यक्रम में भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धियों और दार्शनिक दृष्टिकोण को भी जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि विज्ञान और तकनीक की दिशा में भारत का योगदान कितना महत्वपूर्ण रहा है। साथ ही भारतीय जीवन मूल्यों और परंपराओं पर आधारित विषय भी शामिल किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थी आधुनिक समय में रहते हुए अपनी जड़ों से जुड़ सकें।