केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह फैसला सामने आया है। राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में उन्हें दोबारा अवसर नहीं मिलने के बाद उनके मंत्रिपद छोड़ने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद लिया फैसला
जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल पूरा हो चुका था। कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से अलग होने का निर्णय लिया। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया।
सरकार में संभाल रहे थे कई जिम्मेदारियां
जॉर्ज कुरियन केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे। इसके अलावा उनके पास मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में भी राज्य मंत्री की जिम्मेदारी थी। सरकार में वे कई महत्वपूर्ण विभागों से जुड़े हुए थे।
राज्यसभा चुनाव में नहीं मिला दोबारा अवसर
हाल में हुए राज्यसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें फिर से उम्मीदवार नहीं बनाया। इसी वजह से उनका संसदीय कार्यकाल समाप्त होने के बाद मंत्रिपद पर बने रहने की स्थिति भी समाप्त हो गई। इसी के साथ उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे
केरल के कोट्टायम में जन्मे जॉर्ज कुरियन पेशे से वकील रहे हैं। वे लंबे समय से पार्टी संगठन के साथ जुड़े हुए थे और शुरुआती दौर से सक्रिय भूमिका निभाते रहे। इससे पहले वे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में भी अहम जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
आगे की भूमिका पर बनी रहेगी नजर
केंद्रीय मंत्री पद छोड़ने के बाद अब राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर रहेगी कि भविष्य में पार्टी उन्हें कौन-सी नई जिम्मेदारी सौंपती है। संगठन और सरकार दोनों स्तर पर उनका अनुभव लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।