गाजियाबाद में तीन बहनों की सामूहिक आत्महत्या ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। शुरुआती जांच में एक कथित कोरियन ऑनलाइन टास्क गेम से जुड़ाव की बात सामने आई है। पिता के बयान, सुसाइड नोट और चश्मदीदों की गवाही ने इस घटना को और रहस्यमय बना दिया है। पुलिस अब डिजिटल गतिविधियों से लेकर पारिवारिक हालात तक हर पहलू की पड़ताल कर रही है।
तीनों बहनों की दुनिया बन चुका था ऑनलाइन गेम
पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें पिछले करीब पांच साल से एक ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेम खेल रही थीं, जिसकी शुरुआत कोरोना काल में हुई थी। बताया जा रहा है कि वे इतनी प्रभावित थीं कि अपने नाम तक कोरियन रख लिए थे। रोजमर्रा की गतिविधियां—खाना, सोना और घर के छोटे काम—भी वे एक तय पैटर्न के तहत साथ करती थीं, ताकि किसी को शक न हो कि वे किसी टास्क का पालन कर रही हैं।
मंझली बहन थी ‘बॉस’, वही देती थी टास्क
जांच में यह भी सामने आया है कि 14 वर्षीय मंझली बहन गेम में ‘बॉस’ की भूमिका निभा रही थी और वही अपनी दोनों बहनों को निर्देश देती थी। तीनों के बीच इतनी गहरी बॉन्डिंग बन चुकी थी कि वे हर फैसला मिलकर लेती थीं। कथित तौर पर गेम में 50 टास्क होने की चर्चा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
पिता के खुलासे और सुसाइड नोट की बातें
पिता ने बताया कि उनकी बेटियां अक्सर कहती थीं, “हम कोरिया नहीं छोड़ सकते, वही हमारी जिंदगी है।” सुसाइड नोट में भी बेटियों ने सिर्फ इतना लिखा था—“पापा सॉरी।” भावुक पिता ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। उनका कहना है कि अगर उन्हें टास्क की गंभीरता का अंदाजा होता, तो वे बेटियों को कभी यह गेम खेलने नहीं देते।
चश्मदीद की गवाही से नए सवाल
घटना के एक चश्मदीद ने दावा किया है कि बड़ी बहन पहले कूदने की कोशिश कर रही थी और दोनों छोटी उसे रोक रही थीं, लेकिन कुछ ही पलों में तीनों नीचे गिर गईं। इससे यह सवाल और गहरा गया है कि क्या यह सब किसी तय टास्क का हिस्सा था या आखिरी क्षणों में हालात बेकाबू हो गए। पुलिस इस पहलू पर भी गंभीरता से जांच कर रही है।
कमरा बंद, स्कूल से दूरी और आर्थिक हालात
बताया जा रहा है कि आत्महत्या से पहले तीनों ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया था और फिर खिड़की से बारी-बारी से छलांग लगाई। तेज आवाज सुनकर लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। यह भी सामने आया है कि तीनों करीब दो साल से स्कूल नहीं जा रही थीं और परिवार आर्थिक दबाव से गुजर रहा था। इन सभी बिंदुओं को जोड़कर पुलिस अब पूरी घटनाक्रम की कड़ी तलाश रही है।