गाजियाबाद की एक हाई-राइज सोसायटी में तीन नाबालिग बहनों की एक साथ मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परिवार की आंतरिक स्थितियों, आर्थिक तंगी, शिक्षा छूटने और पिता के बदलते बयानों से जुड़े चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। एक 3 BHK फ्लैट में पूरा परिवार एक कमरे में रहता था—यही पहलू अब जांच का अहम केंद्र बन चुका है।
एक फ्लैट, एक कमरा और कई सवाल
पुलिस जांच में सामने आया है कि जिस 3 BHK फ्लैट में परिवार रहता था, वहां तीन बेडरूम होने के बावजूद सभी लोग एक ही कमरे में सोते थे। पिता चेतन, उसकी तीन पत्नियां और पांच बच्चे उसी कमरे में रात गुजारते थे। अधिकारियों के मुताबिक, घटना वाली रात तीनों बहनों का बिना किसी को बताए बाहर निकल जाना स्वाभाविक नहीं लगता। यही वजह है कि यह बिंदु अब जांच में सबसे ज्यादा खंगाला जा रहा है।
तीन शादियां और उलझी टाइमलाइन
जांच में पिता की निजी जिंदगी भी सवालों के घेरे में है। उसने तीन शादियों की बात स्वीकार की है, लेकिन बच्चों की उम्र और विवाह के वर्षों को लेकर दिए गए बयान आपस में मेल नहीं खा रहे। खास तौर पर तीसरी पत्नी को लेकर पहले इंकार और बाद में स्वीकार करना पुलिस को संदेह में डाल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बार-बार बदले गए बयान मामले को और पेचीदा बना रहे हैं।
दस्तावेजों की कमी, गवाहों की तलाश
जब शादियों से जुड़े प्रमाण मांगे गए तो परिवार कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सका। तारीखें और साल तक ठीक से याद नहीं हैं। अब जांच एजेंसियां स्थानीय लोगों, धार्मिक स्थलों और संभावित गवाहों से जानकारी जुटा रही हैं, ताकि पारिवारिक इतिहास की सही तस्वीर सामने आ सके। माना जा रहा है कि इस अस्थिर ढांचे का असर बच्चों की मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है।
पढ़ाई छूटना और मोबाइल सुराग
तीनों बहनें लंबे समय से स्कूल नहीं जा रही थीं। पिता ने आर्थिक कारणों और पढ़ाई में कमजोरी का हवाला दिया, लेकिन जांच अधिकारी स्कूल रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। इसके साथ ही दो मोबाइल फोन बेचने की बात भी सामने आई है, जिन्हें अब तकनीकी टीम IMEI नंबरों से ट्रैक कर रही है। फोन से संपर्कों और मानसिक हालात से जुड़े अहम संकेत मिलने की उम्मीद है।
आर्थिक तंगी और जांच की दिशा
सूत्रों के मुताबिक परिवार की आय अनिश्चित थी और कर्ज का दबाव लगातार बना हुआ था। सीमित कमाई, बड़ा परिवार और शिक्षा से दूरी—इन सभी कारणों ने बच्चों पर मानसिक बोझ बढ़ाया हो सकता है। पुलिस अब इस मामले को केवल आत्महत्या मानकर नहीं, बल्कि परिस्थितियों के दबाव से जुड़े हर पहलू को जोड़कर जांच कर रही है, ताकि सच्चाई की पूरी परतें सामने आ सकें।