देशभर के गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सरकार अब इन कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसके तहत सभी ई-कॉमर्स और प्लेटफॉर्म कंपनियों से कहा गया है कि वे 22 जून तक अपने यहां काम करने वाले सभी गिग वर्कर्स का पंजीकरण ई-श्रम पोर्टल पर कराएं।
22 जून क्यों है अहम?
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सभी प्लेटफॉर्म कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने वर्कर्स का पूरा डेटा 22 जून तक ई-श्रम पोर्टल पर अपलोड करें। सरकार का उद्देश्य गिग वर्कर्स का सही आंकड़ा जुटाना और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना है। यही वजह है कि यह तारीख काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कौन होते हैं गिग वर्कर्स?
गिग वर्कर्स वे लोग होते हैं जो ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए काम करते हैं। इनमें फूड डिलीवरी करने वाले, कैब चालक, ई-कॉमर्स डिलीवरी कर्मचारी और फ्रीलांस सेवाएं देने वाले लोग शामिल हैं। अब तक इन कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था सीमित रही है।
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सरकार क्या तैयारी कर रही है?
श्रम मंत्रालय नए श्रम कानूनों के तहत गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं तैयार कर रहा है। इसके लिए विशेषज्ञों और फंड प्रबंधकों की मदद ली जा रही है। योजना के तहत भविष्य में बीमा, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा और अन्य सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
एक करोड़ लोगों को मिल सकता है फायदा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार फिलहाल देश में करीब 1 करोड़ गिग वर्कर्स हैं। आने वाले वर्षों में यह संख्या तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में नई व्यवस्था लागू होने पर बड़ी संख्या में कामगारों को सीधा लाभ मिलेगा और उनके लिए आर्थिक सुरक्षा का दायरा मजबूत होगा।
भविष्य के लिए बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के बढ़ते दौर में गिग वर्कर्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उन्हें सामाजिक सुरक्षा देना जरूरी हो गया है। सरकार की यह पहल लाखों परिवारों के लिए राहत भरी साबित हो सकती है और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को भी सुरक्षा का नया आधार मिल सकता है।