कौशांबी से एक बेहद विचित्र और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और पूरे परिवार को सकते में डाल दिया. 18 मार्च को रेलवे ट्रैक के पास एक अज्ञात लड़की की लाश मिली, जिसे उसके बड़े भाई विनोद कुमार ने अपनी बहन अनुराधा बताकर पहचान कर ली. परिवार ने हत्या का आरोप लगाया और डीएनए जांच के लिए सैंपल भी दिए. शव को 72 घंटे बाद लावारिस घोषित कर पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया.
जिंदा मिली लड़की
तीन महीने बाद सर्विलांस और साइबर सेल की पड़ताल के दौरान यह पता चला कि अनुराधा सोशल मीडिया के ज़रिए अपने भाई से वीडियो कॉल कर रही थी. पुलिस ने इंस्टाग्राम कॉल की लोकेशन ट्रेस कर लड़की को शहजादपुर से बरामद किया.
बरामद अनुराधा ने बताया कि वह अपने प्रेमी विष्णु के साथ पुणे में रह रही थी. पुलिस के पहुंचते ही विष्णु फरार हो गया. इस बीच युवती के बयान को 164 के तहत दर्ज किया गया गया .
DNA की अभी तक नहीं आई रिपोर्ट
पुलिस ने मृत समझे गए शव का पोस्टमॉर्टम कराकर डीएनए सैंपल प्रयोगशाला भेजा था और अनुराधा के परिवार के सैंपल भी लिए थे, लेकिन रिपोर्ट अभी तक नहीं आई.
वीडियो कॉल से खुलासा
इंस्टाग्राम वीडियो कॉल के ज़रिए ही यह सनसनीखेज सच सामने आया. पुलिस ने लोकेशन ट्रेस कर अनुराधा को सुरक्षित बरामद किया है.
अब सवाल उठता है कि वो क्षत-विक्षत शव किसकी थी? पुलिस इस पहचान की तह तक जाने की कोशिश कर रही है.
अनुराधा का बयान
बारामद अनुराधा ने पुलिस के सामने बताया कि वह घर के दबाव से नाराज़ होकर पांच महीने पहले उज्जैन गई थी, वहां महाकाल मंदिर में समय बिताया और बाद में पुणे में नौकरी करने लगी. प्रेमी विष्णु बेंगलुरु में रहता है, जिसने आर्थिक मदद की थी.
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
बड़े भाई के पहचान किए जाने से सवाल खड़े हुए. डीएनए और पोस्टमॉर्टम प्रकिया अभी भी पूरा नहीं हुई थी तो शव की पहचान और अंतिम संस्कार पूर्व जांच प्रक्रियाओं में हुई कमी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
यह मामला न सिर्फ एक अज्ञात शव की पहचान की भूल का है, बल्कि सवाल ये भी है कि आखिर उस क्षत-विक्षत शव की सच्चाई क्या होगी?